जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने इस बार कमाल कर दिखाया है. बीजेपी के गढ़ में ही उन्होंने पहली बार चुनाव जीत कर इतिहास रच दिया है. सालों से जहां बीजेपी के नेताओं के अलावा कोई नहीं जीता, वहां पर आज प्रशांत किशोर ने जनसुराज का झंड़ा फहरा दिया है. बता दें कि बीजेपी के एक नेता ने एक समय में कहा था कि अगर हम कुत्ता बिल्ली को भी बांकीपुर में अपनी पार्टी की तरफ से खड़ा करेंगे तो वह भी जीत जाएगा. बता दें कि जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने 19246 वोट अधिक प्राप्त कर जीत हासिल की है. उन्हें कुल 63946 वोट मिले हैं.
प्रशांत किशोर ने बीजेपी की सत्ता पर रखा हाथ
प्रशांत किशोर ने अपनी रैली में बार-बार यह दोहराया था कि बीजेपी के कुत्ता बिल्ली को उम्मीदवार बना कर जीतने वाले घमंड को तोड़ना है. आखिरकार उन्होंने पार्टी के इस अभिमान को तोड़ कर रख दिया है. 1 या 2 हजार वोट ने नहीं बल्कि, हजारों के मत का अंतर देखने को मिला है. खुद न खड़े होकर आम नागरिक को चुनाव में खड़ा करने वाले जनसुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने पहली बार चुनाव लड़ किला फतह कर लिया है.
जीतने की उम्मीद कम लेकिन असंभव नहीं
उन्होंने उसी जगह पर जीत हासिल की जहां से जीतने की उम्मीद थोड़ी कम लग रही थी. रैली के दौरान उन्होंने ग्राउंड में जाकर लोगों से बातचीत की थी. उन्हें आश्वासन दिलाया था. बीजेपी ने भी इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोक दी. पहले प्रशांत किशोर ने सामने बीजेपी ने अभिषेक कुमार सिन्हा को चुना था. बाद में उन्होंने लेकिन पारिवारिक मामलों को हवाला देकर चुनाव में लड़ने के लिए मना कर दिया, जिसके बाद बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को बांकीपुर उपचुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया. हालांकि, तमाम कोशिशों के बाद भी बीजेपी इस चुनाव को नहीं जीत पाई और अपने ही गढ़ में हार गई.
कई राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी की हार हाल ही में बिहार में हुए हंगामे की वजह से हुई है. संभावना है कि आगे आने वाले चुनाव में बिहार की राजनीतिक समीकरण बदल सकता है. बिहार के राजनीतिक गलियारों में बीजेपी के बजाए प्रशांत किशोर की पार्टी की हलचल देखने को मिल सकती है.
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