Basti Inspector Suicide Case: यूपी के बस्ती में वाल्टरगंज थाना प्रभारी सुसाइड केस में पुलिस ने हनी-ट्रैप गैंग का खुलासा किया है. मुंबई स्पा में काम कर चुकी प्रियंका, उसके पिता और एक वकील को दरोगा को ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.

Basti Inspector Suicide Case: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. वाल्टरगंज थाने के प्रभारी (SO) सूर्य प्रकाश सिंह आत्महत्या कांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने दरोगा को ब्लैकमेल कर खुदकुशी के लिए उकसाने वाले एक शातिर हनी-ट्रैप गैंग का पर्दाफाश किया है. इस मामले में पुलिस ने एक महिला, उसके पिता और एक वकील को अरेस्ट किया है. बस्ती के डीआईजी (DIG) संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा किया है. पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.
अस्पताल चौराहे से दबोचे गए तीनों आरोपी
डीआईजी संजीव त्यागी के मुताबिक पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर तीनों आरोपियों को बस्ती के हॉस्पिटल क्रॉसिंग से पकड़ा है. गिरफ्तार आरोपियों में प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव शामिल हैं. पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा गैंग एक सोचे-समझे सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था. ये लोग बड़े अधिकारियों और रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाते थे. फिर फर्जी केस और बदनामी का डर दिखाकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे.
मुंबई के स्पा से हनी-ट्रैप के जाल तक
जांच में प्रियंका चौधरी का आपराधिक बैकग्राउंड सामने आया है. प्रियंका करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी. वह पहले मुंबई में ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटर में काम कर चुकी है. मुंबई से लौटने के बाद वह अपने पिता के साथ वाल्टरगंज के गंधार गांव में रहने लगी थी. वह समृद्ध लोगों को अपनी मीठी बातों और प्यार के जाल में फंसाती थी. इसके बाद उनके प्राइवेट फोटो, वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग तैयार कर लेती थी.
वकील और पिता चलाते थे ब्लैकमेलिंग का धंधा
एक बार जब शिकार प्रियंका के जाल में फंस जाता था, तो बाकी दोनों आरोपियों का खेल शुरू होता था. प्रियंका का पिता राम नयन और वकील विजय प्रकाश कानून का खौफ दिखाते थे. वकील कानूनी दांव-पेच की आड़ में पीड़ित को पुलिस केस और समाज में बदनामी की धमकी देता था. इसके बाद तीनों मिलकर पीड़ित से लाखों रुपये की जबरन वसूली करते थे. दरोगा सूर्य प्रकाश सिंह भी इसी खौफनाक जाल के शिकार बन गए थे.
1:41 बजे का आखिरी कॉल और सुसाइड का सच
वाल्टरगंज थाना प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर फांसी लगा ली थी. 5 सितंबर को उनके बेटे संदीप सिंह ने कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी. पुलिस की जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड से बड़ा खुलासा हुआ. घटना वाले दिन दोपहर 1:41 बजे वकील विजय प्रकाश ने दरोगा को आखिरी कॉल किया था. पुलिस का मानना है कि इस कॉल के दौरान दी गई धमकी और मानसिक प्रताड़ना के चलते ही अधिकारी ने सुसाइड जैसा कदम उठाया.
जेल भेजे गए आरोपी, अन्य पीड़ितों की तलाश
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है. इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से दरोगा और इस गैंग के बीच लगातार संपर्क की बात साबित हो चुकी है. डीआईजी ने बताया कि पुलिस अब इस गैंग के शिकार हुए अन्य लोगों का पता लगा रही है. पुलिस की टीमें इस मामले के सभी कानूनी और डिजिटल पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके.
