Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत ढहने से दो लोगों की मौत हो गई और कई छात्र मलबे में दब गए. पिछले दो सालों में दिल्ली के कबीर नगर, मुस्तफाबाद, साकेत और करोल बाग समेत कई इलाकों में जर्जर इमारतें ढहने से दर्जनों लोग जान गंवा चुके हैं.

Delhi Building Collapse: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक और दर्दनाक हादसा हो गया. आर.के. पुरम के पास स्थित एक इमारत अचानक भरभराकर ताश के पत्तों की तरह गिर गई. बताया जा रहा है कि इस मकान में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र किराए पर रह रहे थे. घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, एनडीआरएफ और प्रशासन की टीम राहत-बचाव कार्य में जुट गई. इस हादसे में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है.
सत्य निकेतन में चीख-पुकार और मलबे का मंजर
रविवार 6 सितंबर की सुबह सत्य निकेतन इलाके में अचानक तेज आवाज के साथ इमारत ढह गई. चश्मदीदों के मुताबिक इमारत गिरते ही चारों तरफ धूल का गुबार छा गया. मलबे के अंदर फंसे एक छात्र ने परिजनों को फोन करके खुद के दबे होने की जानकारी दी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में करीब 20 से 30 छात्र मौजूद हो सकते हैं. फिलहाल पुलिस और बचाव दल मलबे को हटाकर छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में जुटा है.
साल 2024 में हादसों की शुरुआत
दिल्ली में जर्जर और कमजोर निर्माण के ढहने का सिलसिला काफी पुराना है. मार्च 2024 में शाहदरा के कबीर नगर इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत का हिस्सा गिर गया था. उस हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी. इसके बाद अगस्त 2024 में जहांगीरपुरी में एक तीन मंजिला इमारत ढह गई थी. इस हादसे ने भी तीन मासूम जिंदगियों को छीन लिया था.
साल 2025 में काल बने जर्जर मकान
साल 2025 में भी इमारतों के ढहने का सिलसिला रुका नहीं. अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद की एक पुरानी चार मंजिला इमारत गिर गई. इस भयानक हादसे में एक ही परिवार के 8 सदस्यों समेत 11 लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद मई 2025 में पहाड़गंज के अराकशन रोड पर बेसमेंट की दीवार गिरने से चार लोगों की मौत हुई. वहीं जुलाई 2025 में वेलकम इलाके में चार मंजिला मकान ढहने से 6 लोगों ने अपनी जान गंवाई.
अगस्त 2025 में हुआ मौतों का सिलसिला
अगस्त 2025 का महीना दिल्लीवासियों के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ. 9 अगस्त को जैतपुर के हरि नगर में बारिश के कारण मंदिर की दीवार और झुग्गियां ढह गईं, जिसमें 7 लोगों की मौत हो गई. इसके बाद 15 अगस्त को दरगाह शरीफ पत्ते शाह की छत गिरने से 6 लोग मारे गए. वहीं 20 अगस्त को दरियागंज में एक पुराना तीन मंजिला मकान गिरने से 3 लोगों की जान चली गई.
साल 2026 में भी जारी रहा मौत का तांडव
चालू साल 2026 में भी दिल्ली की जर्जर इमारतें लोगों के लिए काल बनी हुई हैं. 30 मई 2026 को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास पांच मंजिला इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत हुई. जुलाई 2026 में रोहिणी सेक्टर 16 की एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई जिसमें 3 लोग मारे गए. इसके बाद 21 अगस्त को करोल बाग में पुरानी इमारत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई. अब सितंबर में सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
