भारत में इंदौर जैसे स्वच्छ और साफ शहर पर दाग लगने के बाद भी कई जगहों पर प्रशासन की आंख अभी तक नहीं खुली है. इंदौर के कुछ दिन बाद ही गांधीनगर से भी कई लोग पाइपलाइन में लीकेज से गंदा पानी आने की वजह से परेशानियों को झेल रहे थे. इसी बीच एक और जगह से ऐसा मामला देखने को मिल रहा है. इंदौर में ये स्थिति कुछ दिनों की थी लेकिन इस जगह पर सालों से ऐसा पानी आ रहा हैं कि कई पीढियों के लोग दिव्यांग हो चुके है. दरअसल, बिहार के रोहतास में 332 गांवों में सालों से फ्लोराइड युक्त पानी आ रहा है, जिसकी वजह से यहां पर कई ग्रामीण दिव्यांग हो चुके हैं.
प्रशासन का काम केवल कागजों सिमटा
पीएचईडी की रिपोर्ट के अनुसार इन गावों में सप्लाई होने वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा पाई गई थी. पानी इतना खराब है कि इस पानी से लोग खाना भी नहीं पका सकते हैं. गरीब लोग लेकिन आर्थिक तंगी होने के कारण इसी पानी को पीते और खाना बनाते हैं. रिपोर्ट आने के बावजूद भी प्रशासन द्वारा अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है. ग्रामीणों का कहना हैं कि यहां का पानी वर्षों से ऐसा होने के कारण कई पीढियां दिव्यांग हो चुकी है. हालत इतनी ज्यादा खराब है कि पशु भी यहां पर दिव्यांग होते हैं. हालांकि, इस समस्या से निपटने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को लगाया गया था. हालत इतनी बदत्तर है कि वह भी कारगार नहीं हो पाया.
अधिकारियों ने दावा किया था इन क्षेत्रों में से अधिकतर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा चुका है. हालांकि, गांव वालों का कहना हैं कि इतने प्लांट के लगने के बाद आज तक उनसे पानी का सप्लाई नहीं शुरू किया गया है. जहां पर पानी आता हैं तो वहां ऑपरेटर न होने के कारण उनका रखरखाव सही से नहीं हो पाया है. इसकी वजह से प्लांट खराब हो चुके हैं.
कहां से आता है यहां पर पानी?
सासाराम में जिला मुख्यालय से 10KM की दूरी पर जमुहार और करवंदिया से यहां पानी की आपूर्ति की जाती है. यह पाइप ऐसे स्थानों होकर गुजरते हैं, जहां गंदा पानी जमा होता है. इन जगहों पर अधिकतर समय पाइप फटी मिलती हैं. विभाग इन पर ध्यान नहीं देती है, जिसके कारण गंदा पानी लोगों के घरों तक जाता है. बरुआ गांव में स्थिती सबसे ज्यादा भयावह देखने को मिली है. यहां के पानी में बाकी जगहों से 10 गुना से अधिक फ्लोराइड देखने को मिला है.
हाल ही में इंदौर में गंदा पानी पीने से बीमार पड़ने पर प्रशासन की नींद नहीं खुली है. यह दर्शाता है कि किस प्रकार प्रशासन को लोगों की सेहत की चिंता नहीं हैं.
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