हाल ही में हुए उपचुनाव में बीजेपी को काफी बड़ा झटका लगा है. दरअसल, दतिया में मजबूत नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर उसकी जगह किसी ओर को टिकट देने के बाद बीजेपी अपना 20 साल का गढ़ खो चुकी है. वह कांग्रेस के उम्मीदवार से 6000 वोटों से हारी है. इस हार के बाद बीजेपी ने ऐसा फैसला लिया, जो कि बहुत कम ही देखने को मिलता है.
अपने 20 साल पुराने गढ़ को हारी
दरअसल, दत्तिया उपचुनाव में बीजेपी ने अपने 6 बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया था. इस बार के उपचुनाव में आशुतोष तिवारी को उम्मीदावर रे रूप में खड़ा किया था. हालांकि, बीजेपी का यह दांव उनको काफी भारी पड़ गया है. कांग्रेस से वह काफी भारी मतों के अंतर से हार गई है. सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि पार्टी के अंदर पहले से ही इस बात को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही थी. कार्यकर्ताओं ने विरोध भी किया था कि चेंज करने से वोटिंग पर असर पड़ सकता है. उसके बावजूद आशुतोष तिवारी को टिकट दिया गया.
बीजेपी ने लिया कड़ा फैसला
सीट को हारने के बाद पार्टी ने समीझा बैठक की और दतिया जिले की पूरी कार्यकारिणी को ही भंग कर दिया. आसान भाषा में समझे तो बीजेपी ने जिला कार्यसमिति, जिला पदाधिकारी, मोर्च, प्रोकष्त, जिलाध्यक्ष और अन्य विभागों सहित पूरा जिला संगठन को भंग कर नए सिरे से संगठन बनाने का फैसला लिया. सूत्रों के मुताबिक पार्टी अपने ही अधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ कर रही थी. उसी वजह से संगठन ने यह बड़ा फैसला दिया. इसी कारण से बीजेपी ने संगठन पर इतनी बड़ी कार्रवाई कर डाली.
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