मेटा ने भारत सरकार के सामने अपनी गलती स्वीकार कर ली है. दरअसल, भारत और मेटा के बीच में बीते कुछ दिनों से विवाद चल रहा था. हालांकि, अब यह विवाद खत्म होते दिखाई दे रहा है. मेटा ने अपनी गलती को स्वीकार कर लिया है. कंपनी पर सरकार ने कई गंभीर सवालों को उठाया था. साथ ही संसदीय समिति ने मेटा कंपनी को अल्टीमेटम दिया था कि तीन दिन के अंदर बिना किसी शर्त के मांगी मांग लें. अगर वह इस चेतावनी पर ध्यान नहीं देते है तो मेटा को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और छूट को वापस लेने का विचार भी किया जा सकता है.
मेटा ने मानी अपनी गलती
दरअसल, मेटा ने अपनी गलती मान ली है. कंपनी ने कहा कि डीपकेक और सीएसएम जैसे मामलों में कुछ कमियां देखने को मिली है. साथ ही प्रधानमंत्री की पोस्ट तकनीकी दिक्कतों की वजह से हट जाने की बात कही. कंपनी ने बताया कि उनके पास ऐसे कंटेट को हटाने के लिए पहले से सख्त नियम है. वह जान कर ऐसे कंटेट को बढ़ावा नहीं देती है.
सरकार क्यों थी नाराज
सरकार ने मेटा को साफ शब्दों में बोला है कि वह केवल ‘इंटरमीडियरी’ की परिभाषा में नहीं आते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी तय करती है कि कौन सा कंटेट पहुंचेगा. ऐसे में इनपर IT Act के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ लागू नहीं होगा. मेटा ने इस पूरे मामले पर अपनी गलती स्वीकार कि है. साथ ही माफी भी मांगी है. सरकार ने मेटा को साफ शब्दों में कहा है कि हर हाल में वह नियमों का पालन करें. जानबूझकर किया गया दुरूपयोग स्वीकार नहीं होगा. बुधवार के दिन मेटा की ग्लोबल टीम में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय के सीनियर अफसर से मुलाकात करी थी. आज भी टीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की है. प्रधानमंत्री का पोस्ट हटाने वाली बात पर मेटा की टीम ने तकनीकी गड़बड़ी की बात की है.
ये भी पढ़ें: नितिन गडकरी के पक्ष में बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, Meta, Google और X को निर्देश
