donald trump iran attack postponed: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को 10 दिनों के लिए टालने का एलान किया है, लेकिन इस बीच वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है और भारतीय निवेशकों को 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कच्चे तेल की कीमतें 111 डॉलर के पार पहुँचने और अमेरिका द्वारा 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के संकेतों ने दुनिया भर में बड़े आर्थिक और सैन्य संकट की आशंका बढ़ा दी है.

donald trump iran attack postponed: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ रही है और महंगाई का खतरा भी बढ़ गया है. इसी बीच Donald Trump के एक बयान ने वैश्विक राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका अगले 10 दिन तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करेगा. इस दौरान बातचीत जारी रहेगी. लेकिन दुनिया भर में मिल रहे कई संकेत यह बता रहे हैं कि हालात सामान्य नहीं हैं और आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है.
सबसे पहला संकेत शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट से मिला है. गुरुवार को अमेरिकी बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. Dow Jones Industrial Average करीब 470 अंक यानी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ. वहीं S&P 500 में भी करीब 0.43 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा. जापान का Nikkei 225 करीब 0.43 प्रतिशत नीचे आ गया. दक्षिण कोरिया का KOSPI भी गिरावट के साथ बंद हुआ. भारत में भी बाजार पर दबाव दिखा. BSE Sensex करीब 1690 अंक टूटकर 73,583 पर बंद हुआ. वहीं Nifty 50 करीब 486 अंक गिरकर 22,819 पर आ गया. इस गिरावट से निवेशकों को लगभग 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
दूसरा बड़ा संकेत कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से मिला है. पहले कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चली गई थीं. लेकिन फिर अचानक तेजी आई. Brent Crude Oil की कीमत बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. आमतौर पर जब तेल और गैस के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो यह किसी बड़े भू-राजनीतिक संकट का संकेत माना जाता है.
तीसरा संकेत डॉलर की मजबूती से मिल रहा है. वैश्विक बाजार में US Dollar Index लगातार मजबूत हो रहा है. इसका असर कई देशों की मुद्रा पर पड़ा है. भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 95 के स्तर तक पहुंच गया है. जब ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ती है तो तेल आयात करने वाले देश ज्यादा डॉलर खर्च करते हैं. इससे उनकी मुद्रा कमजोर होने लगती है.
इन सब संकेतों के बीच अमेरिका की रणनीति पर भी चर्चा तेज हो गई है. Pentagon मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 हजार अतिरिक्त ग्राउंड ट्रूप्स भेजे जा सकते हैं. इससे अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई के ज्यादा विकल्प होंगे. दिलचस्प बात यह है कि पहले भी बातचीत के दौर के बीच अचानक बड़ा हमला हुआ था. ऐसे में दुनिया की नजर अब आने वाले दिनों पर टिकी है. कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगले कुछ दिन वैश्विक राजनीति और बाजार दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.
