उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां शक के घेरे में आकर खड़ी हो गई हैं. जिसके बाद इन सभी रजिस्ट्रियों की जांच शुरू हो गई है. गौतमबुद्ध नगर जिले में जो भी रजिस्ट्रियां शक के घेरे में आई हैं. उनमें से ज्यादातर रकबा ग्रेटर नोएडा में है. इन सभी रजिस्ट्रियों पर आयकर विभाग की नजर पड़ गई है.
गौतमबुद्ध नगर में कई रजिस्ट्रियों पर शक
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व गौतमबुद्ध नगर जिला देता है, लेकिन अब इस जिले की बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां आयकर विभाग के शक के घेरे में आ गई हैं. बताया जा रहा है कि जिले की 1 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रियां आयकर विभाग के रडार पर हैं. आपको बता दें कि इ रजिस्ट्रियों के बैनामा पेपर में कई तरीके की गड़बड़ी पाई गई हैं. इन रजिस्ट्रियों की रजिस्ट्री पेपर की ई-जांच के लिए कानपुर में आयकर विभाग की इंटेलीजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन (ICI) यूनिट अपने काम पर लग गई है.
आयकर विभाग कर रहा जांच
इन रजिस्ट्रियों के लिए रजिस्ट्री कार्यालय की ओर से रजिस्टर वित्तीय लेन-देन विवरण (SFT) की एंट्री की जांच करने के बाद में आयकर विभाग पूरी तरह से इनकी जांच करने में जुट गया है. आयकर विभाग को कई ऐसे बैनामे मिले हैं, जिनमें पैन कार्ड और आधार कार्ड का गलत नंबर लिखाया गया है. जिसके बाद में रजिस्ट्री कार्यालय से इन सभी के बारे में पूरी डिटेल मांगी गई है. आयकर विभाग की टीम इन सभी लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड का सही नंबर जानने के लिए जांच कर रही है.
नवंबर में धीमी हो गई जांच
नवंबर में यह जांच काफी हद तक धीमी हो गई थी. नवंबर में रजिस्ट्री ऑफिस के मेघराज क्लाउड सर्वर को नेशनल गवर्नमेंट क्लाउड पर शिफ्ट किया गया था. इसी के कारण यह जांच धीमी हो गई थी. जिसके बाद में जब सर्वर पूरी तरह से शिफ्ट हो गया, फिर दिसंबर से फिर से जांच में तेजी आ गई. इन सभी रजिस्ट्रियों के पेपर ऑनलाइन हैं, जिसके चलते इन सभी की जांच कानपुर और लखनऊ के अधिकारी कर रहे हैं.
नई तकनीक की मदद से आयकर विभाग टीम कर रहा जांच
कुछ रिपोर्ट्स और जानकारी के मुताबिक गौतमबुद्ध नगर जिले में हर दिन लगभग 100 से भी ज्यादा प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होती है. ऑनलाइन प्रोसेस होने के कारण अब किसी भी जिले में बैठकर आप पूरे राज्य की किसी भी जमीन की रजिस्ट्री के बारे में देख कर उसके बारे में बता लगा सकते हैं. इस नई तकनीक के आने के बाद में आयकर विभाग को काफी मदद मिली है. आयकर विभाग इस तकनीक की मदद से शक के घेरे में आई इन सभी रजिस्ट्रियों की ई-पड़ताल काफी तेजी से कर रहा है.
