Haridwar land scam: हरिद्वार में 54 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत 12 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है.

Haridwar land scam: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से एक बहुत बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है. यह घोटाला करीब 54 करोड़ रुपये का है. इस मामले में सरकार ने बहुत सख्त कदम उठाया है. दो सीनियर आईएएस अफसरों और एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 कर्मचारियों पर बड़ी गाज गिरी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इन सभी के खिलाफ निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी बड़ी कार्रवाई की गई है. इस पूरे मामले की गहराई से जांच करने के लिए अब विजिलेंस को जिम्मेदारी सौंप दी गई है.
इस घोटाले की शुरुआत साल 2024 में नगर निकाय चुनाव के समय हुई थी. उस दौरान इलाके में चुनाव आचार संहिता लागू थी. इसी का फायदा उठाकर हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में लगभग 33 बीघा जमीन खरीदी थी. उस समय नगर निगम का पूरा कामकाज तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी संभाल रहे थे. हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन की असली बाजार कीमत सिर्फ 13 करोड़ रुपये थी, उसे अधिकारियों ने मिलीभगत करके पूरे 54 करोड़ रुपये में खरीद डाला. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह जमीन आखिर किस काम के लिए खरीदी गई, इसका कोई ठोस कारण आज तक सामने नहीं आया है.
इस खेल को अंजाम देने के लिए कागजों में भारी हेरफेर की गई थी. महज कुछ ही दिनों के भीतर कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में बदल दिया गया. राजस्व विभाग के नियमों के मुताबिक इसे धारा 143 की कार्रवाई कहा जाता है. तत्कालीन एसडीएम अजय वीर सिंह ने बिना किसी जांच पड़ताल के मात्र 6 दिन के भीतर जमीन की श्रेणी बदलने का सारा काम निपटा दिया. इतना ही नहीं, इस पूरे फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए एसडीएम कोर्ट के पुराने रिकॉर्ड रजिस्टर को छोड़कर एक नया फर्जी रजिस्टर तक तैयार कर लिया गया था.
मामले का खुलासा तब हुआ जब हरिद्वार नगर निगम चुनाव के बाद नई मेयर किरण जैसल ने अपना पद संभाला. उनके सामने जब इस जमीन की फाइल आई, तो उन्हें गड़बड़ी की आशंका हुई. देखते ही देखते यह मामला पूरी तरह सार्वजनिक हो गया. विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया. इसके बाद यह पूरी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई. मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव रणवीर सिंह चौहान को इसकी विस्तृत जांच सौंपी. सचिव की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की बात पूरी तरह साबित हो गई.
जांच रिपोर्ट सामने आते ही सरकार ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया. शासन ने हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजय वीर सिंह को तुरंत सस्पेंड कर दिया. इनके साथ ही नगर निगम की वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट और कई अन्य लिपिकों पर भी निलंबन की तलवार चली. कुछ अधिकारियों की सेवा तो पूरी तरह समाप्त कर दी गई है. सरकार की इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है. कयास लगाए जा रहे हैं कि विजिलेंस की जांच में आगे कुछ और बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं.
