देहरादून: प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील राज्य उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने त्वरित निर्णयों और ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूदगी से ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की एक नई पहचान कायम की है. हाल ही में देहरादून के नंदा की चौकी पुल की क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड को महज 12 घंटे के भीतर ठीक कराया जाना इसका ताजा उदाहरण है.
नंदा की चौकी पुल: 12 घंटे में बहाल हुआ यातायात
भारी बारिश के कारण देहरादून-अंबाला मार्ग पर स्थित नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हो गई थी. घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा और मुसलाधार बारिश के बीच काम जारी रखने का निर्देश दिया. नतीजतन, PWD, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से युद्धस्तर पर कार्य कर 12 घंटे के रिकॉर्ड समय में पुल पर आवागमन शुरू करा दिया.
सिल्क्यारा सुरंग हादसा: जब 17 दिन तक खुद मोर्चे पर डटे रहे CM
सीएम धामी का यह कार्यशैली मॉडल नवंबर 2023 के सिल्क्यारा टनल हादसे के दौरान पूरी दुनिया ने देखा। सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए मुख्यमंत्री ने घटना स्थल पर ही कैंप कार्यालय बना लिया था. उन्होंने पीएमओ, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ और विदेशी विशेषज्ञों के साथ समन्वय बिठाकर 17 दिनों तक चले महाअभियान की खुद निगरानी की और सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला. इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन को ब्रिक्स (BRICS) आपदा प्रबंधन समूह ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ माना, वहीं बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान और निर्देशक कबीर खान इस पर फिल्म भी बनाने जा रहे हैं.
धराली बाढ़, जोशीमठ संकट और चारधाम यात्रा में त्वरित राहत
वर्ष 2025 में उत्तरकाशी के धराली-हर्षिल में बादल फटने के दौरान खराब मौसम के बावजूद सीएम धामी ने हवाई सर्वेक्षण कर सेना और आईटीबीपी के साथ राहत कार्य का संचालन किया। इसके अलावा, जोशीमठ भू-धंसाव के समय पीड़ितों के पुनर्वास और मुआवजा वितरण की सीधी मॉनिटरिंग से लेकर चारधाम यात्रा के दौरान भूस्खलन में फंसे यात्रियों के भोजन, ठहराव और मार्ग बहाली के लिए वे लगातार एक्टिव मोड में रहे.
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “हमारे लिए आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा का संकल्प है. हमारी प्राथमिकता है कि किसी भी संकट में सरकार सबसे पहले प्रभावित लोगों तक पहुंचे और सभी एजेंसियों के समन्वय से जन-धन की हानि को रोका जाए।”
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