haryana ias officer fir: इस खबर में जानिए हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डी. सुरेश के खिलाफ रिटायरमेंट से ठीक पहले हुई एफआईआर का सच. समझिए कैसे गुरुग्राम के 3.5 करोड़ रुपये के प्लॉट को महज 6.71 लाख में देकर करोड़ों का घोटाला किया गया.

haryana ias officer fir: हरियाणा के प्रशासनिक महकमे से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. 1995 बैच के सीनियर आईएएस अफसर डी. सुरेश 31 अगस्त को सेवानिवृत्त होने वाले थे. लेकिन उनके रिटायरमेंट से ठीक 5 दिन पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है. राज्य के मुख्य सचिव की मंजूरी मिलने के बाद 26 अगस्त को डी. सुरेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. उन पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी जैसी बेहद संगीन धाराएं लगाई गई हैं. इस खबर के सामने आते ही पूरी ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मच गया है.
3.5 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन महज 6.71 लाख में बेची
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक यह मामला गुरुग्राम के पॉश इलाके का है. सेक्टर-23 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) का 500 गज का एक कीमती प्लॉट मौजूद था. बाजार में इस प्लॉट की असली कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये थी. इसका सरकारी कलेक्टर रेट भी 1.75 करोड़ रुपये के आसपास बनता था. लेकिन आरोप है कि अधिकारियों की सांठगांठ से इस बेशकीमती जमीन का मालिकाना हक महज 6.71 लाख रुपये में दे दिया गया. इससे राज्य सरकार के खजाने को करोड़ों का सीधा नुकसान पहुंचा.
2019 में फर्जी नोटशीट बनाकर रद्द की गई थी प्लॉट की जब्ती
इस पूरे मामले की जड़ें साल 1988 के एक पुराने बकाया प्लॉट से जुड़ी हुई हैं. खरीदार द्वारा समय पर पैसा न चुकाने के कारण HSVP ने 2002 में इस प्लॉट को जब्त कर लिया था. इसके बाद करीब 7 सालों तक विजिलेंस की जांच चलती रही. जांच में पता चला कि अफसरों ने किसी दूसरे कोर्ट केस के आदेश का बहाना बनाया. इसके बाद फर्जी नोटशीट तैयार की गई. मार्च 2019 में तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डी. सुरेश ने नियमों को दरकिनार कर जब्ती रद्द कर दी और कौड़ियों के भाव जमीन ट्रांसफर कर दी.
तत्कालीन संपदा अधिकारी समेत 9 लोगों पर भी गिरी गाज
एंटी करप्शन ब्यूरो की इस जांच और एफआईआर में अकेले आईएएस अधिकारी का नाम नहीं है. मामले में तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल 9 कर्मचारियों और अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. सभी पर मिलीभगत करके फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी संपत्ति का नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं. विजिलेंस की रिपोर्ट के बाद ही सरकार ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. फिलहाल डीएसपी स्तर के अधिकारी इस पूरे घोटाले की आगे की जांच कर रहे हैं.
हाईकोर्ट से मिली राहत, गिरफ्तारी से पहले मिलेगा 7 दिन का नोटिस
मामला दर्ज होने के बाद डी. सुरेश ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारी को राहत प्रदान की है. अदालत ने आदेश दिया है कि अगर पुलिस या एसीबी उन्हें हिरासत में लेना चाहती है, तो उन्हें कम से कम 7 दिन का अग्रिम नोटिस देना होगा. इस मामले की अगली कानूनी सुनवाई अब 16 अक्टूबर तय की गई है. फिलहाल अधिकारी को तुरंत गिरफ्तारी से राहत मिल गई है.
चर्चित आईपीएस सुसाइड केस से भी जुड़े रहे हैं आईएएस डी. सुरेश
आईएएस डी. सुरेश हाल ही में एक और चर्चित मामले की वजह से खबरों में रहे थे. उन्होंने आईपीएस वाई पूरन कुमार के सुसाइड केस में खुलकर अपनी बात रखी थी. उन्होंने तत्कालीन डीजीपी समेत 15 बड़े अफसरों पर गंभीर सवाल उठाए थे और पीड़ित परिवार का समर्थन किया था. ऐसे में रिटायरमेंट के ठीक पहले हुई इस अचानक कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
