Saudi arabia houthi attack: इस खबर में जानिए कैसे यमन के हूती विद्रोहियों के हमले के बाद सऊदी अरब अकेले पड़ गया है. क्राउन प्रिंस सलमान के दो बार फोन करने पर भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य मदद से इनकार कर दिया, जबकि पाकिस्तान भी मक्का समझौते से पीछे हट गया.

Saudi arabia houthi attack: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच सऊदी अरब के लिए स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण होती जा रही हैं. यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ छिड़ी जंग में सऊदी अरब खुद को अकेला महसूस कर रहा है. सऊदी अरब को रक्षा सहायता का दावा करने वाले उसके सबसे करीबी सहयोगी वक्त आने पर पीछे हटने लगे हैं. सबसे पहले पाकिस्तान ने अपने ‘मक्का रक्षा समझौते’ के तहत कार्रवाई करने से पल्ला झाड़ लिया. इसके बाद जब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मदद के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की, तो वहां से भी उन्हें सीधा इनकार ही सुनने को मिला.
यमन के मोखा बंदरगाह पर कब्जे से बढ़ा खतरा
यमन की सीमा और लाल सागर से सटे इलाकों में हूती विद्रोहियों की बढ़त लगातार जारी है. गुरुवार को हूतियों ने रणनीति के लिहाज से बेहद अहम मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया. इस बंदरगाह पर कब्जे के बाद वे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब पहुंच गए हैं. यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे प्रमुख व्यापारिक और समुद्री जहाजों के रूटों में से एक माना जाता है. यमन की सऊदी समर्थित सेनाएं इस इलाके से पीछे हटने को मजबूर हो गई हैं. साल 2022 में हुए युद्धविराम के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है.
क्राउन प्रिंस सलमान ने दो बार किया ट्रंप को फोन
विद्रोही सेनाओं के तेजी से आगे बढ़ने पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्राउन प्रिंस ने गुरुवार को दो बार ट्रंप को फोन लगाकर तत्काल अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की मांग की. यमन की सेना के पीछे हटने और मोखा पर हूतियों का कब्जा होने का हवाला देकर सीधी कार्रवाई की अपील की गई थी. हालांकि ट्रंप ने अमेरिका को किसी नए सैन्य मोर्चे में झोंकने से साफ मना कर दिया.
अमेरिका का ईरान और होर्मुज की सुरक्षा पर फोकस
अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप अभी कोई नया सैन्य युद्ध शुरू नहीं करना चाहते हैं. अमेरिका का मानना है कि ईरान समर्थित इस लड़ाई का मुकाबला क्षेत्रीय देशों को खुद अपने दम पर ही करना चाहिए. अमेरिकी रक्षा विभाग ने सऊदी अरब को सिर्फ इंटेलिजेंस यानी खुफिया जानकारियां मुहैया कराने का भरोसा दिया है. अमेरिका इस समय अपना पूरा ध्यान ईरान और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर ही केंद्रित रखना चाहता है. हालांकि इस नए विवाद के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं.
पाकिस्तान का मक्का समझौते पर यू-टर्न
सऊदी अरब के लिए दूसरा बड़ा झटका पाकिस्तान के ढुलमुल रवैये से लगा है. हाल ही में अगस्त में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ हुआ था. इसके तहत किसी भी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाना था. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले तो हूतियों पर कड़ा रुख अपनाने की धमकी दी थी. लेकिन हूतियों द्वारा सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले के 24 घंटे के भीतर ही पाकिस्तान अपने बयान से पलट गया.
बिना विदेशी मदद के संकट में घिरा सऊदी अरब
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि मक्का समझौता केवल एक रक्षात्मक तंत्र है और पाकिस्तान हूतियों पर सैन्य हमले की योजना नहीं बना रहा है. पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है, इसलिए वह सीधे इस जंग में नहीं कूदना चाहता. इस तरह पाकिस्तान के इनकार और अमेरिका के पीछे हटने से सऊदी अरब के सामने अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है. अब यह देखना बाकी है कि सऊदी अरब इस बहुकोणीय सुरक्षा संकट से बिना किसी सीधी मदद के कैसे निपटता है.
