Bank strike called off September: इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों (UFBU) की देर रात हुई बैठक में सहमति बनने के बाद बैंकों की 3 दिवसीय हड़ताल टल गई है. 5-Day Banking और PLI स्कीम पर जल्द समाधान निकाला जाएगा.

Bank strike called off September: बैंक ग्राहकों और आम जनता के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है. देश के तमाम बैंकों में होने वाली प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है. रविवार रात इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच एक अहम बैठक हुई. करीब रात 9:30 बजे शुरू हुई इस लंबी बातचीत में कई बड़े फैसले लिए गए. इसके बाद बैंक यूनियनों ने अपना हड़ताल का फैसला वापस ले लिया. अगर यह हड़ताल होती, तो लगातार तीन दिन तक बैंकिंग सेवाएं ठप हो जातीं. इससे आम लोगों को कैश निकालने से लेकर चेक क्लियरेंस तक में भारी परेशानी उठानी पड़ती. त्योहारी सीजन के करीब आते ही अगर बैंक बंद रहते, तो व्यापारियों का भी भारी नुकसान होता. लेकिन अब सभी बैंक हमेशा की तरह सामान्य रूप से काम करेंगे.
शनिवार की छुट्टी पर बनी हाई लेवल कमेटी
बैंक कर्मचारियों की लंबे समय से मांग रही है कि हर शनिवार को छुट्टी घोषित की जाए. इस बड़े मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सुलह का रास्ता निकाला गया है. अब IBA और UFBU मिलकर एक हाई लेवल कमेटी बनाएंगे. यह कमेटी शनिवार की छुट्टी के सभी संभावित विकल्पों पर गहराई से विचार करेगी. इसमें ग्राहकों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा. कोशिश यह है कि ऐसा फैसला लिया जाए जिससे बैंक यूनियनों की मांग भी पूरी हो जाए और आम जनता को भी कोई असुविधा न हो. सभी हितधारकों से बातचीत के बाद ही इस पर अंतिम मोहर लगेगी. यह मुद्दा बैंक कर्मचारियों के लिए बेहद जरूरी रहा है, इसलिए कमेटी जल्द से जल्द कोई बीच का रास्ता निकालेगी.
अधिकारियों की PLI स्कीम पर होगा बदलाव
बैठक में बैंक अधिकारियों से जुड़ा एक और अहम मुद्दा सुलझाया गया. यह मुद्दा स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए बनी PLI (प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन) स्कीम से जुड़ा था. यूनियनों और बैंक एसोसिएशनों को इस स्कीम के कुछ नियमों पर आपत्ति थी. अब तय हुआ है कि इन आपत्तियों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए स्कीम में बदलाव किया जाएगा. इसके लिए IBA के साथ जल्द ही विस्तृत चर्चा शुरू होगी. बदलाव का नया और फाइनल प्रस्ताव तैयार करके सीधा सरकार को भेजा जाएगा. इससे वरिष्ठ अधिकारियों को उनके काम का सही और उचित लाभ मिल सकेगा.
पुरानी पेंडिंग मांगों पर भी बनी सहमति
हड़ताल टालने के पीछे एक और बड़ी वजह पेंडिंग मांगों पर मिली सहमति है. दरअसल इसी साल 8 मार्च 2024 को भी बैंक यूनियनों की एक अहम बैठक हुई थी. उस बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) में कई जरूरी मुद्दे दर्ज किए गए थे, जो अब तक पेंडिंग थे. रविवार की रात हुई बातचीत में इन पुराने मुद्दों को भी टेबल पर रखा गया. IBA ने भरोसा दिया है कि उन सभी पेंडिंग मुद्दों का भी जल्द ही समाधान निकाला जाएगा. दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रहेगा. इस ठोस भरोसे के बाद ही यूनियन के नेता हड़ताल टालने के लिए राजी हुए.
आंदोलन टलने से बैंकिंग सेक्टर में लौटी शांति
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपनी मांगों को लेकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली थी. तीन दिन की प्रस्तावित हड़ताल से पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम पर ब्रेक लग सकता था. करोड़ों रुपये का लेन-देन रुकने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता. लेकिन बातचीत के बाद यूनियन ने अपने सभी प्रस्तावित विरोध कार्यक्रमों को टालने पर सहमति जता दी है. इस फैसले से न सिर्फ सरकार और बैंक प्रबंधन ने राहत की सांस ली है, बल्कि शेयर बाजार और व्यापारिक जगत में भी एक पॉजिटिव संदेश गया है. यूनियनों का कहना है कि वे सकारात्मक बातचीत के पक्षधर हैं.
आम जनता और ग्राहकों को मिली सबसे बड़ी टेंशन से मुक्ति
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी जीत आम आदमी की हुई है. महीने के अंत में बैंक बंद होने से सैलरी, पेंशन और ईएमआई (EMI) जैसे जरूरी काम अटक जाते. एटीएम (ATM) में कैश की किल्लत होने का भी डर बना रहता. लेकिन IBA और बैंक यूनियनों की इस सफल मीटिंग ने इन सभी परेशानियों को टाल दिया है. अब ग्राहक बिना किसी टेंशन के अपने बैंक जा सकते हैं. फिलहाल के लिए हड़ताल का संकट पूरी तरह टल चुका है. लोग अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के लेन-देन तय समय पर कर सकेंगे.
