india china oil competition: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण समुद्री रास्ते बाधित होने से भारत और चीन के बीच रूसी और सऊदी तेल को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के पास सीमित (30 दिन) तेल भंडार होने के कारण दबाव अधिक है, जबकि चीन अपने विशाल भंडारण के चलते बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है.

india china oil competition: Strait of Hormuz में तनाव और समुद्री रास्ता बाधित होने के बाद दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है. इस स्थिति में India और China के बीच तेल खरीदने की होड़ तेज हो गई है. दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल हैं. सीमित सप्लाई के कारण अब दोनों देश खासकर Russia और कुछ हद तक Saudi Arabia से मिलने वाले कच्चे तेल के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. अमेरिका और Iran के बीच शांति वार्ता रुकने से तेल बाजार पर दबाव और बढ़ गया है.
तेल बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है. डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर की वरिष्ठ विश्लेषक म्यूयू शू ने बताया कि भारत और चीन दोनों जून में मिलने वाले रूसी तेल के कार्गो के लिए जोर लगा रहे हैं. ईरान से तेल की सप्लाई लगभग बंद होने के कारण चीन अब ज्यादा मात्रा में रूसी तेल खरीदना चाहता है. इससे बाजार में मांग और बढ़ गई है. दूसरी तरफ अमेरिका ने कुछ समय के लिए रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दी है, जिससे वैश्विक बाजार में थोड़ी राहत जरूर मिली है.
होर्मुज के रास्ते तेल आयात में भारी गिरावट आई है. पहले चीन रोजाना लगभग 44.5 लाख बैरल तेल इसी रास्ते से मंगाता था. लेकिन अप्रैल में यह घटकर करीब 2.22 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. भारत के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. फरवरी में भारत लगभग 28 लाख बैरल प्रतिदिन तेल इसी मार्ग से आयात कर रहा था. लेकिन अप्रैल में यह घटकर करीब 2.47 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. इस गिरावट के कारण दोनों देशों को अब दूसरे स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है.
विशेषज्ञों के मुताबिक इस संकट में भारत ज्यादा दबाव में है. भारत के पास सीमित तेल भंडार है, जो लगभग 30 दिनों की जरूरत ही पूरी कर सकता है. वहीं चीन के पास तीन से चार महीने तक की मांग पूरी करने लायक भंडार मौजूद है. इसी कारण चीन थोड़ी बेहतर स्थिति में माना जा रहा है. इसके अलावा चीन की बड़ी पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री को भी लगातार तेल की जरूरत पड़ती है. इसलिए वह किसी भी स्थिति में तेल आयात जारी रखना चाहता है.
रूस से तेल खरीदने में भी दोनों देशों के बीच मुकाबला बढ़ गया है. मार्च में भारत ने लगभग 45.7 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था. इसमें से करीब 21.4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल रूस से आया था. वहीं चीन ने भी लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा. अप्रैल में स्थिति ऐसी हो गई कि भारत और चीन दोनों लगभग 16-16 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल ले रहे हैं. इसके अलावा सऊदी अरब के तेल को लेकर भी दोनों देशों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव लंबा चला तो भविष्य में सबसे बड़ी चुनौती तेल की कीमत नहीं बल्कि उसकी उपलब्धता होगी.
