बिहार में अभी के समय में भरत तिवारी एनकाउंटर केस विवादों में है. इस केस ने वहां की कार्यप्रणाली और पुलिस पर काफी गंभीर सवाल खड़ा किया है. बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, यह पहला केस नहीं है. इससे पहले भी कई मासूमों का फेक एनकाउंटर कर मारा गया है.
2010 में जम्मू कश्मीर का माचिल फर्जी एनकाउंटर
इस मामले में भारतीय सेना ने तीन बेगुनाह कश्मीरी लोगों को पाकिस्तान का घुसपैठिया बताकर LoC के पास में मार गिराया था.
भारतीय सेना की इस हरकत का पता लगने के बाद में कश्मीर में काफी हिसंक माहौल हो गया था. साथ ही स्थानीय लोगों ने कई महीनों तक प्रदर्शन किया था. जांच के दौरान में पाया कि तीनों युवक स्थानीय थे. उन्हें नौकरी का झांसा देकर लाया गया था, जिसके बाद कोर्ट मार्शल हुआ और 5 सैन्यकर्मी को उम्रकैद की सजा हुई.
1991 का पीलीभीत फर्जी एनकाउंटर
इस मामले में भी काफी आक्रामकता देखने को मिली थी. दरअसल, पुलिस ने 10 सिख तीर्थयात्रियों को बिना किसी प्रूफ के आतंकवादी घोषित कर दिया और जंगल में अलग-अलग ले जाकर मार दिया.
इसके बाद 2016 में विशेष सीबीआई अदालत ने इसे ठंडे दिमाग से की गई हत्या करार किया और 47 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.
2006 का एटा फर्जी एनकाउंटर
इस केस में पुलिस ने अपने प्रमोशन के लिए सारा खेल रचा था. दरअसल, राजाराम नामक युवक ने एक निर्दोश युवक को डकैत घोषित करके उसका एनकाउंटर कर दिया था. ऐसा इसलिए किया गया ताकि पुलिसकर्मियों को प्रमोशन मिल सके.
2022 में सीबीआई की जांच के बाद में 5 पुलिसकर्मी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
2020 का तमिलनाडु में बेन्निक्स कस्टोडियल मर्डर केस
दरअसल, लॉकडाउन के दौरान में एक पिता और बेटे ने दुकान खोला था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें 8 घंटे तक थाने में रखा और पिटाई कर उनकी हत्या कर दी. पुलिस ने इसे सामान्य हत्या दिखाने की कोशिश की, जिसके बाद में व्यापारियों ने गुस्से में दुकानें बंद की और सड़क जाम कर दिया.
भारी हंगामे के बाद में पुलिस ने मामले की जांच के लिए CBI को आगे लाया. इसके बाद 2026 में 9 पुलिसकर्मी को फांसी की सजा सुनाई गई.
दिल्ली में 2008 का बटला हाउस एनकाउंटर
दरअसल, इस केस में जामिया नगर इलाके में दिल्ली के स्पेशल सेल ने IM(इंडियन मुजाहिद्दीन) के संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन शुरू किया था. इस ऑपरेशन में पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा और दो संदिग्धों को मारा गया था. जामिया मिलिया इस्लामिया यूर्निवर्सिटी के बाहर में जमकर हंगामा हुआ था. कई विरोध प्रदर्शन हुए थे.
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