iran missile attack: ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 के तहत इजरायल पर खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया है, जिसमें तेल अवीव और सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया. 3000 किमी की रेंज वाली इन मिसाइलों के हमले से पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है.

iran missile attack: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने एक बार फिर बड़ा हमला किया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया है कि उसने इजरायल के अहम ठिकानों को निशाना बनाया. बताया गया कि ऑपरेशन “ट्रू प्रॉमिस-4” के 19वें चरण में ईरान ने शक्तिशाली खोर्रमशहर-4 मिसाइलें दागीं. इन मिसाइलों को “या हसन इब्न अली” कोडनेम के साथ लॉन्च किया गया. हमले का निशाना Tel Aviv का इलाका, Ben Gurion Airport और इजरायली एयर फोर्स की 27वीं स्क्वाड्रन का बेस बताया गया है. ईरान का दावा है कि इन मिसाइलों के साथ हमलावर ड्रोन भी भेजे गए. इनकी मदद से इजरायल की कई स्तर वाली हवाई सुरक्षा को पार किया गया.
ईरान के अनुसार इन मिसाइलों में लगभग एक टन वजनी वारहेड लगाया गया था. बताया गया कि मिसाइलों ने इजरायल की बहुस्तरीय एयर डिफेंस प्रणाली को पार कर लक्ष्य की ओर बढ़त बनाई. इससे पहले ऑपरेशन के 18वें चरण में भी हमले किए गए थे. ईरान का कहना है कि उस चरण में बहरीन, यूएई और कुवैत में मौजूद अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरानी सेना ने दावा किया कि इन हमलों के बाद अमेरिकी सैनिकों में घबराहट फैल गई. उनका कहना है कि कुछ सैनिक अपने ठिकाने छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
खोर्रमशहर-4 मिसाइल को खैबर मिसाइल के नाम से भी जाना जाता है. यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसे सड़क पर चलने वाले लॉन्चर से दागा जा सकता है. इसकी लंबाई लगभग 13 से 13.5 मीटर बताई जाती है. इसका व्यास करीब 1.5 से 1.8 मीटर तक होता है. इस मिसाइल का कुल वजन लगभग 15 से 20 टन तक बताया जाता है. इसमें करीब 1800 किलो तक पेलोड ले जाने की क्षमता है. मिसाइल में एक टन से ज्यादा हाई एक्सप्लोसिव वारहेड लगाया जा सकता है. ईरान का दावा है कि यह मिसाइल 2000 से 3000 किलोमीटर तक मार कर सकती है और दूर के लक्ष्य को भी काफी सटीकता से निशाना बना सकती है.
इस मिसाइल की एक खासियत इसकी तेज तैयारी और रफ्तार भी बताई जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक इसे लॉन्च करने की तैयारी करीब 15 मिनट में पूरी हो सकती है. यह अंतरिक्ष के बाहर बहुत तेज गति से उड़ती है और फिर वातावरण में दाखिल होकर लक्ष्य की ओर बढ़ती है. बताया जाता है कि इसमें कई वारहेड लगाने की भी क्षमता है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह एक साथ कई छोटे लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है. अंतिम चरण में इसका वारहेड अलग होकर बहुत तेजी से गिरता है. इसी वजह से दुश्मन की एयर डिफेंस के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है.
खोर्रमशहर मिसाइल का विकास ईरान की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन ने किया है. इस मिसाइल का पहला परीक्षण साल 2017 में हुआ था. उस समय परीक्षण के दौरान एक मिसाइल हवा में ही फट गई थी. इसके बाद इसी साल इसे सार्वजनिक रूप से दिखाया गया. बाद में इसके अलग-अलग संस्करण तैयार किए गए. साल 2019 में एक छोटा वर्जन सामने आया जिसकी रेंज लगभग 3000 किलोमीटर बताई गई. 2020 में खोर्रमशहर-2 का परीक्षण हुआ. फिर 2023 में खोर्रमशहर-4 यानी खैबर को आधिकारिक तौर पर पेश किया गया. ईरान का दावा है कि यह उसकी सबसे तेज और सटीक मिसाइलों में से एक है. इन हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है.
