Lahore heritage names: पाकिस्तान के लाहौर में कृष्ण नगर और जैन मंदिर चौक जैसे ऐतिहासिक हिंदू-सिख नामों को बहाल करने की योजना पर भारी विवाद छिड़ गया है. कट्टरपंथियों के बढ़ते विरोध और सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव के चलते मरियम नवाज सरकार ने बैकफुट पर आते हुए फिलहाल इस फैसले पर अचानक यू-टर्न ले लिया है.

Lahore heritage names: पाकिस्तान के लाहौर में सड़कों और इलाकों के पुराने नाम वापस लाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पहले सरकार ने दावा किया था कि कई ऐतिहासिक नाम फिर से बहाल किए जाएंगे. इसमें इस्लामपुरा को दोबारा कृष्ण नगर बनाने की बात कही गई थी. बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर जैन मंदिर चौक करने की भी घोषणा हुई थी. इसके अलावा सुन्नत नगर को संत नगर और मुस्तफाबाद को धर्मपुरा कहने की तैयारी थी. इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा शुरू हो गई थी. लोगों ने इसे लाहौर की पुरानी पहचान लौटाने की कोशिश बताया था.
लेकिन अब पाकिस्तान सरकार अपने ही फैसले से पीछे हटती दिखाई दे रही है. लाहौर प्रशासन ने साफ कहा है कि अभी किसी भी सड़क या इलाके का नाम नहीं बदला गया है. प्रशासन का कहना है कि यह मामला अभी विचाराधीन है. यानी फिलहाल पुराने नाम वापस लाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इस मुद्दे पर सरकार ने अचानक यू-टर्न ले लिया. इससे पहले पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय ने खुद इस योजना की जानकारी मीडिया को दी थी. अब उसी फैसले को लेकर चुप्पी दिखाई दे रही है.
दरअसल इस फैसले के बाद पाकिस्तान में कुछ कट्टरपंथी संगठनों और सोशल मीडिया व्लॉगर्स ने सरकार का विरोध शुरू कर दिया था. उनका कहना था कि हिंदू और सिख दौर के नामों को फिर से लाना सही नहीं है. विरोध बढ़ने के बाद मरियम नवाज सरकार बैकफुट पर आ गई. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार किसी नए विवाद से बचना चाहती है. इसी वजह से नाम बदलने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया. प्रशासन अब इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहा है.
लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल यानी LHAR ने पहले इस योजना को मंजूरी दी थी. इस बैठक की अध्यक्षता पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने की थी. बाद में इतिहासकारों, आर्किटेक्ट्स, शहरी योजनाकारों और दूसरे विशेषज्ञों की एक बैठक भी बुलाई गई. इसमें लाहौर की पुरानी पहचान को बचाने पर चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने कहा कि शहर के ऐतिहासिक नाम उसकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं. कई लोगों ने पुराने नाम बहाल करने का समर्थन भी किया. उनका मानना था कि इससे इतिहास और पर्यटन दोनों को फायदा मिलेगा.
लाहौर की जिन सड़कों और इलाकों के नाम बदलने की चर्चा थी, उनमें कई मशहूर जगहें शामिल थीं. क्वीन्स रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड और एम्प्रेस रोड जैसे नाम पहले ही बदले जा चुके हैं. इसी तरह कृष्ण नगर, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, राम गली और कुम्हारपुरा जैसे पुराने नाम भी इतिहास का हिस्सा बन गए. अब सवाल यह है कि पाकिस्तान अपनी ऐतिहासिक पहचान को बचाना चाहता है या कट्टरपंथी दबाव के आगे झुकता रहेगा. फिलहाल सरकार ने इस पूरे मामले को टाल दिया है.
