Cheetah Death in Kuno National Park: ये आर्टिकल मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी 27 महीने की मादा चीता KGP11 की इलाज के दौरान हुई मौत की जानकारी देता है. इसमें मुरैना के जंगल में उसके घायल मिलने, रेस्क्यू ऑपरेशन और चीता संरक्षण अभियान को लगे इस झटके के बाद देश में बचे चीतों की संख्या पर प्रकाश डाला गया है.

Cheetah Death in Kuno National Park: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक दुखद खबर सामने आई है. यहां भारत में जन्मी 27 महीने की मादा चीता KGP11 की इलाज के दौरान मौत हो गई. पिछले कुछ दिनों से उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई थी. उसे पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे थे. कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या के बीच यह घटना वन्यजीव प्रेमियों और अधिकारियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. KGP11 को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन आखिरकार उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. इस खबर के बाद वन विभाग और चीता परियोजना से जुड़े अधिकारियों में भी निराशा का माहौल है.
जानकारी के अनुसार 1 जून को यह मादा चीता मुरैना जिले के पहाड़गढ़ वन क्षेत्र के पास घायल अवस्था में मिली थी. उसकी हालत काफी खराब थी और वह गंभीर रूप से जख्मी थी. जैसे ही इसकी सूचना वन विभाग को मिली, तुरंत विशेषज्ञों और फील्ड स्टाफ की टीम मौके पर पहुंची. रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चीता को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए पालपुर के पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया. वहां उसकी जांच की गई और इलाज शुरू किया गया. अधिकारियों का मानना था कि समय रहते उपचार मिलने से उसकी जान बच सकती है. इसी उम्मीद के साथ कई दिनों तक लगातार इलाज जारी रखा गया.
पालपुर केंद्र में डॉक्टरों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने दिन-रात मेहनत की. KGP11 की स्थिति पर हर समय नजर रखी गई. उसे आवश्यक दवाएं और विशेष चिकित्सा सुविधा दी गई. बावजूद इसके उसकी चोटें काफी गंभीर थीं. उपचार के दौरान उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया. आखिरकार शनिवार शाम उसने दम तोड़ दिया. चीता परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि टीम ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोटों की गंभीरता के कारण सफलता नहीं मिल सकी. यह घटना एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को सामने लाती है.
अधिकारियों के मुताबिक मादा चीता की मौत की असली वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम कराया जाएगा. रविवार को विशेषज्ञों की मौजूदगी में उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा. रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उसकी मौत किन कारणों से हुई. फिलहाल वन विभाग और चीता परियोजना की टीम पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और जरूरी निर्णय लिए जाएंगे. इससे यह भी पता चल सकेगा कि चीता को लगी चोटें किस वजह से हुई थीं और उसकी स्थिति इतनी गंभीर कैसे हुई.
इस घटना के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या में बदलाव आया है. अब कूनो में कुल 49 चीते बचे हैं, जिनमें भारत में जन्मे 32 चीते शामिल हैं. इनमें से 19 चीते इस समय खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं. बाकी सभी चीते सुरक्षित और स्वस्थ बताए जा रहे हैं. यदि पूरे देश की बात करें तो भारत में अब चीतों की कुल संख्या 52 रह गई है. इनमें कूनो नेशनल पार्क के 49 और गांधी सागर अभयारण्य के 3 चीते शामिल हैं. KGP11 की मौत ने चीता संरक्षण अभियान को एक झटका जरूर दिया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को सफल बनाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे.
