सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट और छात्रों पर हो रहे लाठीचार्ज पर चिंता व्यक्त की है. इसी वजह से उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है. साथ ही उन्होंने छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर इलाके में दो घंटे का मौन व्रत भी रखा था. उनके सहयोगी दत्ता आवारी ने इस मामले के बारे में बताया है.
पत्र के लिखे जाने की बताई वजह
प्रधानमंत्री को लिखे जाने वाले पत्र का कारण बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि पीएम इस देश के सर्वोच्च नेता है. जनता के लिए उनका जवाब बेहद जरूरी है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि जनता की आवाज को न दबाए, जबावदेही को तय करें. किसी का इस्तीफा लेने से सरकार गिर नहीं जाती है. देश के युवा बेरोजगारी, पेपर लीक परीक्षाओं में देरी से परेशान है. इसी कारण से सरकार आंदोलन को न दबाए. इसके बजाए कोशिश करें कि प्रदर्शनकारी संवाद करें और समाधान निकाले.
उनके शब्दों से साफ पता लग रहा था कि वह इस मामले में जवाबदेही चाहते है. वह मामले में जल्द सुनवाई करने के लिए बोल रहे हैं. अगर देरी हुई तो बच्चों से संवाद करने में परेशानी हो सकती है. हालांकि, सरकार ने आगे से सीजेपी पार्टी से बातचीच करने की इच्छा जताई है, लेकिन वह उन्हें तीन शर्तों को मानने के लिए कह रहे हैं.
महात्मा गांधी के प्रतिमा के पास में किया प्रदर्शन
उन्होंने महाराष्ट्र में 2 घंटे का मौन व्रत 11 से शुरू किया और 2 बजे तक चलाया. महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास में विरोध प्रदर्शन भी किया, जिसके बाद वह अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए निकल पडे़. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को बेहद ही पीड़ादायक बताया है. साथ ही कहा कि प्रदर्शनकारियों की बातें धैयपूर्वक सुननी चाहिए. विश्वास का माहौल और सकारात्मक संवाद के सहारे समाधान का तालाश आसानी से किया जा सकता है.
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