मध्य प्रदेश के सतना जिले में जिला अस्पताल के बाहर एंबुलेंस का दरवाजा जाम हो गया, जिससे अंदर मौजूद मरीज ने दम तोड़ दिया. इसके बाद लोगों के अंदर विभाग की लापरवाही को लेकर काफी गुस्सा भरा हुआ है.
एंबुलेंस में तोड़ दिया मरीज ने दम
मध्य प्रदेश से सिस्टम की लापरवाही का एक अनोखा मामला सामने आया है. मध्य प्रदेश के सतना जिले में अब एक बार फिर से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुलती हुई नजर आई है. सतना जिले में एक रेफर किया हुआ गंभीर मरीज एंबुलेंस के अंदर ही कैद होकर रह गया. जिसके बाद जब तक एंबुलेंस का गेट खुला और मरीज को बाहर निकाला गया, तो मरीज ने दम तोड़ दिया था.
जिला अस्पताल के गेट की घटना
इस पूरे मामले को लेकर जिला अस्पताल के स्वास्थ्य महकमे का कहना है कि मरीज अस्पताल में पहुंचने से पहले ही मर चुका था. मध्य प्रदेश के सिस्टम की लापरवाही की यह पोल खोलने वाली घटना सतना के जिला अस्पताल सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल के गेट की है. जानकारी के मुताबिक 108 एंबुलेंस में गंभीर रूप से बीमार राम प्रसाद नाम से एक व्यक्ति को जिला अस्पताल रेफर किया गया था.
जिला अस्पताल किया गया था रेफर
रामनगर के रहने वाले 67 साल के राम प्रसाद सुबह के समय अचानक बेहोश हो गए थे, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां कुछ समय के इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें 108 एंबुलेंस की मदद से सतना जिला अस्पताल में रेफर कर दिया था. जब एंबुलेंस व्यक्ति को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, तो युवक की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि एंबुलेंस जब अस्पताल पहुंची, तो उसका दरवाजा जाम हो गया, जिसके बाद जब कोशिश करके दरवाजा खोला तो व्यक्ति की मौत हो गई थी.
ड्राइवर ने की खिड़की से घुसने की कोशिश
जब एंबुलेंस का दरवाजा नहीं खुला तो बाहर से लोग लात-घूसों और औजारों की मदद से एंबुलेंस का दरवाजा खोलने लगे. एंबुलेंस के ड्राइवर ने खिड़की की मदद से भी अंदर घुसने की कोशिश की. काफी कोशिशें करने के बाद जब एंबुलेंस का दरवाजा खुला तो, युवक की मौत हो गई थी. इस मामले में स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीज की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी. मामला तेज होने के बाद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी मनोज शुक्ला ने जिला समन्वयक अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए मामले में कार्रवाई की बात कही है.
