Mohan Yadav vs Jitu Patwari Controversy: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच “मोहन लाल” टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. इस विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की भी एंट्री हो गई है, जिन्होंने मुख्यमंत्री के तीखे पलटवार और भाषा पर आपत्ति जताते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है.

Mohan Yadav vs Jitu Patwari Controversy: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. मामला तब शुरू हुआ जब सतना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए उन्हें “मोहन लाल अभिनंदन यादव” कहकर संबोधित किया. इसके बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया. अगले ही दिन शुजालपुर में हुई एक जनसभा में मुख्यमंत्री ने इस टिप्पणी का जवाब देते हुए कांग्रेस और उसके प्रदेश अध्यक्ष पर तीखा हमला बोला. इसके बाद दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया.
शुजालपुर की सभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जीतू पटवारी का नाम लिए बिना उन पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अगर कोई उन्हें अभिनंदन लाल कहता है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है. लेकिन उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब भी राज्य में विकास कार्य होते हैं तो कांग्रेस को परेशानी होने लगती है. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने ऐसे व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है जो अपना चुनाव तक नहीं जीत सका. मुख्यमंत्री का इशारा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की ओर था, जिसमें जीतू पटवारी इंदौर की राऊ सीट से हार गए थे.
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस के साथ-साथ राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया. उन्होंने दावा किया कि देश के कठिन समय में विपक्ष जिम्मेदारी निभाने के बजाय राजनीति करता है. साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार का मुद्दा भी उठाया. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लंबे शासनकाल में सीमित संख्या में मेडिकल कॉलेज बने, जबकि भाजपा सरकार ने कम समय में कई नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए हैं. उन्होंने कांग्रेस से इन मुद्दों पर जवाब देने और जनता से माफी मांगने की भी बात कही. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई.
मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद जीतू पटवारी ने भी पलटवार किया. उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दे उठाने पर उन्हें अपमानित किया गया है. पटवारी ने इसे किसानों और सामान्य परिवारों से आने वाले युवाओं का अपमान बताया. चुनाव हारने को लेकर किए गए तंज का जवाब देते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण दिया. उन्होंने याद दिलाया कि अटल जी भी एक चुनाव हार चुके थे. पटवारी ने सवाल किया कि क्या हारने वाला हर नेता अयोग्य माना जाएगा. साथ ही उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में जनता बदलाव का फैसला कर सकती है और प्रदेश में नई सरकार बना सकती है.
इस पूरे विवाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सामने आए. उन्होंने मुख्यमंत्री की भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को मर्यादित शब्दों का प्रयोग करना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की. उनका कहना था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ की गई टिप्पणी सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी कांग्रेस का अपमान है. फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. दोनों दल अपने-अपने नेताओं के समर्थन में खड़े हैं और बयानबाजी का यह दौर आगे भी जारी रहने के संकेत दे रहा है.
