दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से बीजेपी में बवाल मच गया। समर्थकों के विरोध, हिंसा और राजनीतिक अटकलों ने चुनावी माहौल गरमा दिया।

मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय सबसे ज़्यादा चर्चा अगर किसी बात की है… तो वो है बीजेपी के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना। वो नरोत्तम मिश्रा… जो कई साल तक मध्य प्रदेश के गृह मंत्री रहे… वो नरोत्तम मिश्रा… जिन्हें अमित शाह का बेहद करीबी माना जाता है…वो नरोत्तम मिश्रा… जो बीजेपी के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं… इतना बड़ा कद… इतना बड़ा अनुभव… फिर भी पार्टी ने ऐन वक्त पर उनका टिकट काट दिया। और टिकट कटते ही दतिया में ऐसा बवाल मचा… जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। समर्थक सड़क पर उतर आए… नेशनल हाईवे जाम हो गया… पुलिस पर पथराव हुआ… एसपी समेत कई 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए… पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा… आंसू गैस छोड़नी पड़ी… अब सवाल यही है… आखिर ऐसा क्या हो गया कि बीजेपी ने अपने ही इतने बड़े नेता को टिकट नहीं दिया?
आखिर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
VO सबसे पहले ये समझिए कि दतिया में उपचुनाव हो क्यों रहा है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को करीब साढ़े सात हजार वोटों से हराया था। लेकिन बाद में एक मामले में अदालत ने राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुना दी। सजा के बाद उनकी विधायकी चली गई… और अब उसी सीट पर उपचुनाव हो रहा है। नरोत्तम मिश्रा को पूरा भरोसा था कि पार्टी इस बार फिर उन्हीं पर भरोसा करेगी। क्योंकि पिछली बार भी हार का अंतर बहुत कम था… और इस बार प्रदेश में बीजेपी की सरकार भी है। ऐसे में जीत की संभावना पहले से ज्यादा मानी जा रही थी।
जब टिकट का ऐलान हुआ… तो सब चौंक गए। बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया। बस… यहीं से पूरा खेल बदल गया। जो कार्यकर्ता कई दिनों से नरोत्तम मिश्रा के लिए तैयारी कर रहे थे… वो नाराज़ हो गए। दतिया में विरोध शुरू हो गया। समर्थक सड़क पर उतर आए। हाईवे जाम कर दिया गया। पुलिस पहुंची… फिर पथराव शुरू हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि एसपी समेत कई पुलिस वाले घायल हो गए। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा… आंसू गैस छोड़नी पड़ी… और कई लोगों को हिरासत में भी लेना पड़ा। यानी बीजेपी की सरकार में… बीजेपी के ही कार्यकर्ताओं पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।
आखिर टिकट क्यों कटा?
अब सबसे बड़ा सवाल… आखिर नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों काटा गया? बीजेपी ने इसकी कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है।लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कहा जा रहा है कि, दिल्ली से जो फीडबैक गया… उसे देखकर पार्टी ने आखिरी समय में उम्मीदवार बदल दिया। कुछ लोगों का कहना है कि, संगठन की राय को ज्यादा महत्व दिया गया। कुछ का कहना है कि, स्थानीय समीकरणों को देखते हुए नया चेहरा उतारा गया।
क्या नया पावर सेंटर बनने का डर था?
राजनीति में ताकत सिर्फ चुनाव जीतने से नहीं आती… ताकत आती है संगठन में पकड़ से। जानकारों का कहना है कि, अगर नरोत्तम मिश्रा चुनाव जीत जाते… तो उन्हें दोबारा मंत्री बनाना लगभग तय माना जाता। और अगर ऐसा होता… तो मध्य प्रदेश बीजेपी में एक नया पावर सेंटर खड़ा हो सकता था। पहले से ही मोहन यादव…
शिवराज सिंह चौहान… ज्योतिरादित्य सिंधिया… कैलाश विजयवर्गीय… नरेंद्र सिंह तोमर जैसे बड़े नेता मौजूद हैं। ऐसे में पार्टी शायद एक और ताकतवर धड़ा खड़ा नहीं करना चाहती थी। हालांकि यह सिर्फ राजनीतिक चर्चाएं हैं।
अमित शाह के इतने करीबी फिर भी टिकट क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है। जब नरोत्तम मिश्रा को अमित शाह का करीबी माना जाता है… जब उन्होंने कई राज्यों में बीजेपी के लिए चुनावी रणनीति बनाई… जब उनका संगठन में इतना अनुभव है… तो फिर उनका टिकट क्यों काटा गया? क्या कोई ऐसी रिपोर्ट पार्टी के पास थी… जिसमें कहा गया कि इस बार नरोत्तम मिश्रा जीत नहीं पाएंगे? अगर ऐसी कोई रिपोर्ट थी… तो उन्हें पहले क्यों नहीं बताया गया? अगर पहले बता दिया जाता… तो शायद इतना बड़ा बवाल नहीं होता। यही सवाल अब उनके समर्थक भी उठा रहे हैं।
अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव जीतना नहीं… बल्कि अपने ही नाराज़ नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाना है। अगर नरोत्तम मिश्रा के समर्थक पूरी तरह शांत नहीं हुए…तो इसका असर चुनाव पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ अगर पार्टी सभी नेताओं को साथ लेकर चलने में सफल रही… तो नुकसान की भरपाई भी हो सकती है। फिलहाल इतना तय है कि… दतिया का यह उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह बीजेपी के अंदर की राजनीति… नेतृत्व… और संगठन की ताकत की भी परीक्षा बन चुका है। अब देखना होगा… क्या नरोत्तम मिश्रा पार्टी के फैसले को पूरी तरह स्वीकार कर प्रचार करेंगे… या उनके समर्थकों की नाराज़गी आगे भी जारी रहेगी। आपको क्या लगता है… बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर सही फैसला लिया… या फिर इतना बड़ा नेता होने के बावजूद उनके साथ न्याय नहीं हुआ?
