Operation sindoor controversy: ये खबर बहुत ही सरल भाषा में समझाता है कि ऑपरेशन सिंदूर में 6 सैन्यकर्मियों की शहादत की बात सामने आने के बाद, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा स्पीकर को विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा है.

Operation sindoor controversy: देश की राजनीति में इस समय संसद से लेकर सोशल मीडिया तक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस पार्टी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने और गलत जानकारी देने का बहुत बड़ा आरोप लगाया है. कांग्रेस के बड़े नेता और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र सौंपा है. इस पत्र में उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Notice) की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है. कांग्रेस का सीधा-सीधा कहना है कि देश के रक्षा मंत्री ने संसद के भीतर देश की जनता और सदन के सामने सच को छिपाया है. यह पूरा मामला अब सरकार और विपक्ष के बीच एक बड़ी जंग का रूप ले चुका है.
आइए अब सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद है क्या. केरल के अलाप्पुझा से सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा के नियम 223 के तहत यह कड़ा नोटिस दिया है. उन्होंने स्पीकर को याद दिलाया कि 28 जुलाई 2025 को लोकसभा में पहलगाम आतंकी हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर एक बड़ी चर्चा हुई थी. उस बहस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में दावा किया था कि इस पूरे मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान ड्यूटी निभाते हुए भारत का कोई भी सैनिक शहीद नहीं हुआ है. उन्होंने इसे ‘नो कैजुअल्टी’ यानी बिना किसी नुकसान वाला ऑपरेशन बताया था. कांग्रेस का कहना है कि रक्षा मंत्री का यह बयान पूरी तरह से झूठ, भ्रामक और तथ्यों से परे था.
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस नोटिस के साथ एक बड़ा सबूत भी पेश किया है. उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आए एक सरकारी और आधिकारिक बयान में बहुत बड़ा खुलासा हुआ है. इस खुलासे के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना के पांच जवान और वायुसेना के एक जांबाज कर्मी शहीद हुए थे. कांग्रेस का गुस्सा इस बात पर है कि जब हमारे छह जवान इस ऑपरेशन में वीरगति को प्राप्त हुए, तो सरकार ने पिछले साल जुलाई में संसद में यह क्यों कहा कि कोई शहीद नहीं हुआ. हाल ही में नई दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पर इन छह जवानों के नाम लिखे गए हैं. यह पहली बार है जब सरकार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि ये जवान इस ऑपरेशन में शहीद हुए थे.
हालांकि, इस गंभीर आरोप के बाद रक्षा मंत्रालय भी चुप नहीं बैठा है और उसने अपनी तरफ से सफाई दी है. रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे विपक्ष के दावों को पूरी तरह से भ्रामक और गलत बताया है. मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुराने भाषण की एक छोटी सी क्लिप को बिना पूरा संदर्भ जाने गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, रक्षा मंत्री ने यह कभी नहीं कहा था कि ऑपरेशन में कोई सैनिक शहीद ही नहीं हुआ. असल में उस समय बाजार में एक अफवाह उड़ रही थी कि भारत के वायुसेना पायलट मारे गए हैं. रक्षा मंत्री तो बस उस गलत और झूठी कहानी का जवाब दे रहे थे.
अब आपको थोड़ा पीछे ले चलते हैं कि आखिर यह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हुआ कब और क्यों था. भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर 6 और 7 मई 2025 की रात को पाकिस्तान के खिलाफ यह बड़ा ऑपरेशन शुरू किया था. दरअसल, 22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तान के पालतू आतंकवादियों ने 26 मासूम पर्यटकों की गोलियों से भूनकर बेरहमी से हत्या कर दी थी. इसी का बदला लेने के लिए भारत ने पाकिस्तान और पीओके (PoK) में घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर भारी गोलाबारी हुई, जो 10 मई को पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने और युद्धविराम की मांग के बाद थमी. भारत सरकार का साफ कहना है कि यह ऑपरेशन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसे सिर्फ कुछ समय के लिए टाला गया है.
