Owaisi questions on Assam Rifles: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुवाहाटी में भारत-म्यांमार सीमा सुरक्षा पर असम राइफल्स और आरएसएस से जुड़े संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सेमिनार पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

Owaisi questions on Assam Rifles: हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने असम राइफल्स और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच बढ़ते तालमेल को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. ओवैसी ने एक हालिया मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए देश की सुरक्षा एजेंसियों और केंद्र सरकार की वैचारिक मातृ संस्था के बीच बढ़ते सहयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि सरकारी सुरक्षा बलों और एक खास विचारधारा वाले संगठन के बीच इस तरह का तालमेल देश के लिए ठीक नहीं है. असदुद्दीन ओवैसी के मुताबिक यह इस बात का साफ संकेत है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था और उसकी सोच को किस तरह की चीजें प्रभावित कर रही हैं.
म्यांमार सीमा विवाद पर गुवाहाटी में हुआ था दो दिनों का खास सेमिनार
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर अपनी यह कड़ी राय रखी है. उन्होंने गुवाहाटी में आयोजित हुए एक खास सेमिनार पर छपी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाए हैं. यह सेमिनार पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) राज्यों की सीमा सुरक्षा को लेकर आयोजित किया गया था. इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘इंडो-म्यांमार फ्रंटियर इश्यूज एंड वे फॉरवर्ड’ (भारत-म्यांमार सीमा मुद्दे और आगे की राह) रखा गया था. यह महत्वपूर्ण सेमिनार बीते 17 और 18 जून को गुवाहाटी शहर में आयोजित किया गया था, जिसमें सीमा से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
आरएसएस से जुड़े संगठन और देश के सबसे पुराने बल ने मिलकर किया आयोजन
मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इस दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन देश के सबसे पुराने अर्धसैनिक बल ‘असम राइफल्स’ और ‘सीमांत चेतना मंच पूर्वोत्तर’ ने मिलकर किया था. सीमांत चेतना मंच को आम तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा या उससे प्रेरित संगठन माना जाता है. हालांकि यह संस्था खुद को एक रजिस्टर्ड सामाजिक-सांस्कृतिक और पूरी तरह से गैर-राजनीतिक संगठन बताती है. वहीं दूसरी तरफ असम राइफल्स भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद अर्धसैनिक बलों में से एक है. इस बल पर मुख्य रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की रखवाली की बड़ी जिम्मेदारी है.
कई बड़े सैन्य अफसरों और नीति निर्माताओं ने लिया था इस बैठक में हिस्सा
इस सेमिनार में पूर्वोत्तर की सुरक्षा से जुड़े कई बड़े दिग्गजों ने हिस्सा लिया था. इसमें भारतीय सेना और असम राइफल्स के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सरकार के नीति-निर्माता, शिक्षाविद, सुरक्षा मामलों के एक्सपर्ट और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. इन सभी लोगों ने भारत और म्यांमार की सीमा से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों पर गहराई से मंथन किया था. इस चर्चा में मुख्य रूप से सीमा पार से होने वाला उग्रवाद, नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी, अवैध घुसपैठ और बॉर्डर मैनेजमेंट को और ज्यादा मजबूत बनाने जैसे गंभीर विषयों पर बात की गई थी.
ओवैसी का तीखा तंज, सुरक्षा नीतियों पर हावी हो रही है सत्ताधारी दल की सोच
एआईएमआईएम सांसद ओवैसी ने इस संयुक्त आयोजन को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने संकेत दिया कि सत्ताधारी दल की खास विचारधारा अब देश की सुरक्षा नीतियों पर भी अपना असर डाल रही है. ओवैसी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि आरएसएस जो कि भाजपा की वैचारिक मातृ संस्था है, उसका राज्य सुरक्षा बलों के साथ इस तरह का बढ़ता तालमेल बेहद चिंताजनक है. यह दिखाता है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था और उसकी रणनीतिक सोच को संभवतः क्या प्रभावित कर रहा है. आपको बता दें कि इस सेमिनार में नगालैंड सरकार के मंत्री टेमजेन इम्ना अलोंग भी शामिल हुए थे, जिन्होंने कहा था कि सीमाएं देश को बांटती नहीं बल्कि उसकी सुरक्षा तय करती हैं.
