Public Examination Amendment Bill: संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह आज से शुरू हो गया है. केंद्र सरकार की तरफ से आज लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET, UPSC, SSC, NTA इत्यादि) में होने वाले पेपर लीक और धांधली पर रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है. यह विधेयक परीक्षा पेपर लीक और नकल रोकने के लिए लाया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह इसे पेश करेंगे.
इस बिल के जरिए 2024 में बने कानून में बदलाव किए जाएंगे. आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान होगा. राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी.
मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाई
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद सत्र के दौरान संयुक्त रणनीति तैयार करने के लिए सोमवार सुबह विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है.
बिल पर चर्चा के लिए लिस्ट में युवा सांसदों के नामइस अहम बिल पर सरकार की ओर से लगभग 8 से 10 घंटे चर्चा होने की संभावना है. एनडीए ने इस बहस में अपने युवा सांसदों को प्रमुखता से आगे करने की रणनीति बनाई है और सरकार की ओर से अधिकांश वक्ता युवा सांसद होंगे.युवाओं और नए सांसदों पर नजर संसद में होने वाली इस अहम बहस में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से युवा सांसदों की स्पीकर्स लिस्ट काफी चर्चा में है.
बांसुरी स्वराज (भाजपा) और सायोनी घोष (टीएमसी) जैसे युवा चेहरे इस मुद्दे पर छात्रों व परीक्षार्थियों के पक्ष में अपनी-अपनी पार्टियों का रुख स्पष्ट करने के लिए वक्ताओं की सूची में शामिल हैं. सरकार की कोशिश है कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले माफियाओं पर बिना किसी कानूनी ढील के सीधे लगाम लगाई जा सके.
विधेयक के प्रमुख कड़े प्रावधान
सख्त सजा
पेपर लीक या नकल कराने में शामिल संगठित गिरोहों और दोषियों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख से ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान.
फास्ट-ट्रैक कोर्ट
मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Special Fast Track Courts) के गठन का प्रस्ताव, जो चार्जशीट के 3 महीने के भीतर फैसला सुनाएंगी.
स्पेशल टास्क फोर्स (STF)
बड़े या अंतरराज्यीय गिरोहों की जांच के लिए 2 महीने के भीतर समयबद्ध जांच (Time-bound investigation) पूरी करने के निर्देश
सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर सख्ती
परीक्षा कराने वाली कंपनियों की गड़बड़ी पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना और 8 साल के लिए बैन.
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