Udaipratap singh house arrest: ये खबर प्रतापगढ़ के कुंडा में मुहर्रम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विधायक राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह और उनके 13 समर्थकों को नजरबंद करने और वहां के एक दशक पुराने विवाद की पूरी जानकारी देता है.

Udaipratap singh house arrest: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा इलाके से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. मुहर्रम के त्योहार को देखते हुए जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था और आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है. प्रशासन ने कुंडा के बाहुबली विधायक राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह को उनके 13 समर्थकों के साथ हाउस अरेस्ट यानी नजरबंद कर दिया है. जिला प्रशासन को डर था कि त्योहार के दौरान इलाके में कोई सांप्रदायिक तनाव न पैदा हो जाए. इसी वजह से एहतियात के तौर पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है.
कुंडा के उप जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की तरफ से इस संबंध में एक लिखित आदेश जारी किया गया है. इस सरकारी आदेश के मुताबिक राजा उदय प्रताप सिंह के साथ साथ उनके करीबी समर्थकों जैसे जितेंद्र यादव, आनंदपाल, रमाशंकर मिश्र, भवानी विश्वकर्मा और रवि सिंह पर पाबंदी लगाई गई है. इनके अलावा हनुमान प्रसाद पांडेय, केसरी नंदन पांडेय, जमुना प्रसाद मौर्य, निर्भय सिंह, गया प्रसाद प्रजापति, मोहनलाल और जुगनू विश्वकर्मा को भी नजरबंद किया गया है. इन सभी लोगों को 25 जून की सुबह 5 बजे से लेकर 26 जून की रात 9 बजे तक अपने ही घर के अंदर रहने का सख्त निर्देश दिया गया है.
कुंडा के शेखपुर आशिक गांव में हर साल मुहर्रम के मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है. इस गांव में पिछले एक दशक से अधिक समय से तनाव की स्थिति बनती आ रही है, जिसके पीछे एक पुरानी कहानी है. दरअसल साल 2012 में इस गांव में एक बंदर की मौत हो गई थी, जिसके बाद गांव वालों ने वहां पर एक हनुमान मंदिर का निर्माण करवा दिया था. इस मंदिर के बनने के बाद से ही राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह हर साल मुहर्रम वाले दिन ही वहां हनुमान पाठ और भंडारे का आयोजन करने लगे, जिससे विवाद शुरू हुआ.
शुरुआत के दो सालों यानी 2013 और 2014 में भंडारा और मुहर्रम का जुलूस एक साथ शांति से निकले थे. लेकिन साल 2015 में अचानक हालात बिगड़ गए. मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मंदिर पर भंडारा करने और झंडा लगाने का कड़ा विरोध किया. उन्होंने उस साल ताजिया उठाने से साफ मना कर दिया और सड़क पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया. साल 2016 में जब जिला प्रशासन ने भंडारे की मंजूरी नहीं दी, तो यह पूरा मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया था. कोर्ट ने इस पर फैसला लेने का अधिकार पूरी तरह से वहां के डीएम के विवेक पर छोड़ दिया था.
हाई कोर्ट के उस निर्देश के बाद से ही राजा उदय प्रताप सिंह को हर साल मुहर्रम के मौके पर नजरबंद करना प्रशासन की एक परंपरा जैसा बन गया है. साल 2016 से लेकर अब तक उन्हें 6 बार से ज्यादा समय के लिए नजरबंद किया जा चुका है. इस बार भी प्रशासन सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है. पूरे मुहर्रम रूट को चार अलग अलग सेक्टरों में बांट दिया गया है. तीन किलोमीटर के दायरे में भारी पुलिस फोर्स, पीएसी और बड़े अधिकारियों को तैनात किया गया है. प्रतापगढ़ के अपर पुलिस अधीक्षक बृजनंदन राय ने इसे शांति बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है, जबकि राजा भैया के समर्थकों में इस फैसले को लेकर भारी गुस्सा है.
