Jitendra Mishra Ram Mandir CEO: कारगिल युद्ध में मिराज विमानों को 12 दिनों में लेजर बम से लैस कर पाकिस्तान को हराने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या राम मंदिर का नया सीईओ बनाया गया है.

Jitendra Mishra Ram Mandir CEO: अयोध्या के भव्य राम मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में जितेंद्र मिश्रा का नाम अचानक चर्चा में आ गया है. लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह नया चेहरा कौन है. देश की सुरक्षा और वायुसेना से जुड़े लोग इन्हें एक बेहद जांबाज और रणनीतिक अफसर के रूप में जानते हैं. इन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में पर्दे के पीछे रहकर ऐसा तकनीकी कमाल किया था, जिसने जंग का पूरा पासा ही पलट दिया था. आइए जानते हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की इस वीरगाथा और उनके अनोखे मिशन के बारे में.
कारगिल की मुश्किल पहाड़ियां और सेना के सामने खड़ी चुनौती
कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल और तोलोलिंग जैसी ऊंची चोटियों पर पाकिस्तानी घुसपैठियों ने अपने मजबूत बंकर बना लिए थे. माइनस तापमान और कठिन रास्तों के कारण भारतीय जवानों के लिए नीचे से ऊपर की ओर बढ़ना बेहद मुश्किल हो रहा था. पारंपरिक बमबारी से दुश्मन के उन बंकरों को नष्ट कर पाना लगभग नामुमकिन साबित हो रहा था. ऐसे नाजुक मोड़ पर भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ शुरू किया. शुरुआती दिनों में मिग फाइटर जेट्स को काफी नुकसान पहुंचा, जिसके बाद लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल करने का बड़ा फैसला लिया गया.
अमेरिका का इनकार और तकनीक को जोड़ने का बड़ा संकट
वायुसेना के बेड़े में सबसे आधुनिक फाइटर जेट ‘मिराज 2000’ था, लेकिन इसमें लेजर गाइडेड बम फिट करने की तकनीक अधूरी थी. ग्वालियर एयर बेस पर पिछले दो सालों से बम के फ्यूज और विमान के सिस्टम को जोड़ने की कोशिशें चल रही थीं. ऐन वक्त पर अमेरिका ने भारत को यह तकनीक देने से साफ मना कर दिया था. हर बीतते दिन के साथ देश के जवान शहीद हो रहे थे, इसलिए कोई गलती करने की गुंजाइश नहीं थी. इस मुश्किल घड़ी में यह कठिन जिम्मेदारी स्क्वाड्रन लीडर जितेंद्र मिश्रा और उनकी खास टीम को सौंपी गई.
इजराइल का साथ और महज 12 दिनों में कर दिखाया चमत्कार
इस कठिन समय में इजराइल ने भारत की मदद की और अपनी ‘लिटनिंग टारगेटिंग पॉड’ तकनीक उपलब्ध कराई. यह पॉड एक इलेक्ट्रॉनिक आंख की तरह काम करता था, जो जमीन पर मौजूद टारगेट पर लेजर बीम डालकर सटीक निशाना लगाता था. सबसे बड़ी चुनौती इजराइली तकनीक और लेजर बमों को फ्रांसीसी मिराज विमान के साथ जोड़ना था. जितेंद्र मिश्रा और उनकी टीम ने दिन-रात एक करके केबल, सर्किट बोर्ड और सॉफ्टवेयर पर काम किया. जिस काम में महीनों का वक्त लगता है, उसे मिश्रा जी की टीम ने महज 12 दिनों में पूरा करके इतिहास रच दिया.
24 जून 1999 का दिन और कारगिल के आसमान में भीषण हमला
12 दिनों की दिन-रात की मेहनत का असली टेस्ट 24 जून 1999 को कारगिल के आसमान में हुआ. मिराज 2000 विमानों ने ग्वालियर से उड़ान भरी और दुश्मन के ठिकानों पर लेजर गाइडेड बम गिरा दिए. सैकड़ों फीट ऊपर से गिरे इन बमों ने पलक झपकते ही पाकिस्तानी बंकरों और बारूद के डिपो को मलबे में तब्दील कर दिया. यह भारतीय वायुसेना का पहला ऐसा हमला था, जिसमें युद्ध के दौरान लेजर गाइडेड बमों का बिल्कुल सटीक उपयोग हुआ था. इस हमले ने दुश्मन की कमर तोड़ दी और जंग का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया.
18 प्रकार के फाइटर जेट्स और वेस्टर्न एयर कमांड की कमान
कारगिल की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद जितेंद्र मिश्रा की सैन्य यात्रा लगातार नए मुकाम हासिल करती रही. उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा समय तक आसमान में उड़ान भरी है और 18 से अधिक प्रकार के विमान उड़ाए हैं. वह वायुसेना के चीफ टेस्ट पायलट, फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ जैसे बड़े पदों पर रहे. उनकी इसी काबिलियत के कारण 1 जनवरी 2025 को उन्हें भारतीय वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण ‘वेस्टर्न एयर कमांड’ का एयर मार्शल बनाया गया, जो भारत की पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा संभालती है.
राम मंदिर निर्माण समिति में मिली नई जिम्मेदारी
अपनी उत्कृष्ट सैन्य सेवाओं के बाद अब एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या राम मंदिर निर्माण समिति का नया सीईओ नियुक्त किया गया है. उनके पास विशाल प्रशासनिक अनुभव, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में सटीक फैसले लेने की क्षमता है. अब वे अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विकास और प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालेंगे. कारगिल की जंग में देश की रक्षा करने वाले इस योद्धा पर अब देश के सबसे भव्य सांस्कृतिक केंद्र को सुचारू रूप से चलाने की बड़ी जिम्मेदारी है.
