अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए हालिया चढ़ावा चोरी और गबन प्रकरण के बाद अब ट्रस्ट अपनी वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करने जा रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट अपने पूरे वित्तीय ढांचे को नए सिरे से पुनर्गठित (Restructure) करने की तैयारी में है. इसके तहत देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ मौजूदा व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है. कल दिल्ली में होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
कल होने वाली बैठक में अंतिम मोहर
सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के खातों को एसबीआई से हटाकर किसी अन्य सरकारी अथवा प्रतिष्ठित निजी बैंक में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार चल रहा है. इस अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर कल होने वाली ट्रस्ट की उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा. कल की बैठक में ट्रस्ट के तमाम पदाधिकारी और स्थायी सदस्य मौजूद रहेंगे, जहां इस प्रशासनिक फेरबदल को हरी झंडी मिल सकती है.
पेशेवर हाथों में होगी वित्तीय कमान
चढ़ावा चोरी विवाद से सबक लेते हुए ट्रस्ट अब मंदिर के दान-पात्रों से प्राप्त होने वाली धनराशि की गिनती, लेखा-जोखा और संपूर्ण वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह से पेशेवर और पारदर्शी व्यवस्था के तहत संचालित करना चाहता है. इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए ट्रस्ट में बाहरी विशेषज्ञों और प्रोफेशनल्स की एक विशेष टीम तैनात की जाएगी.
इसके तहत
स्थायी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CAs) की देखरेख में पूरा ऑडिट सिस्टम तैयार होगा. मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स (MBA) को प्रशासनिक और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी.सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों और अनुभवी बैंक कर्मचारियों को चढ़ावे की गिनती और दैनिक बैंकिंग लेनदेन की निगरानी के लिए नियुक्त किया जाएगा.
इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य राम मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को फूलप्रूफ बनाना है, ताकि भविष्य में वित्तीय अनियमितताओं या चोरी की गुंजाइश को पूरी तरह से खत्म किया जा सके.
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