उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. दरअसल, यहां पर एक विवाद को सुलझाने आई पुलिस ने बेरहमी से युवक की पिटाई कर उसकी हत्या कर दी है. एक लाचार पिता जिसने खुद पुलिस को घरेलू विवाद सुलझाने के लिए बुलाया था. हालांकि, उन्हें नहीं पता था कि जिसे वह बुला रहे हैं वह उनके लिए काल बनकर आएगा.
जानकारी के मुताबिक, 30 वर्षीय मनीष बेंगलुरु में त्योहारों पर मेहंदी लगाने का काम करता था. कुछ ही दिन पहले वह अपने परिवार के लोगों से मिलने के आया था. उसके दो छोटे बच्चे भी है. घर वापस आने के कुछ दिन बाद उसकी अपने पिता से किसी मामूली सी बात पर कहासुनी हो गई. विवाद के बढ़ने पर पिता ने पुलिस को डॉयल 112 पर कॉल करके बुला लिया. पिता को लगा की पुलिस की मौजूदगी में विवाद पूरा सुलझ जाएगा.
हालांकि, विवाद को सुलझाने के लिए आई पुलिस ही उनके बेटे का काल बन गई. दरअसल, पीआरवी पुलिस की टीम मनीष को घर से खींचकर प्रधान के दरवाजे पर ले गई है. जहां बंद परिसर के अंदर उसके साथ खूब मारपीट की गई है. मारपीट इतनी बेरहमी से की गई थी कि मनीष का पूरा शरीर लहूलुहान हो गया. उसे काफी गंभीर चोटें आई. पुलिस ने मनीष के साथ पिटाई कर उसे अधमरी हालत में वहां छोड़ दिया.
मां और भाई ने जब देखा तो मनीष पूरी तरीके से अधमरी अवस्था में था, जिसके बाद परिवार वाले उसे तुरंत अस्पताल लेकर गए. उसे पहले स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कलवारी लेकर जाया गया. जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक इलाज कर बस्ती में रेफर कर दिया. हालांकि, पुलिस द्वारा बेरहमी से की गई पिटाई से आई आंतरिक चोटों की वजह से मनीष ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
परिवार ने पुलिस पर अपने बेटे की मौत का आरोप लगाया है. परिवार वालों ने बताया कि बेटे को अस्पताल ले जाने के बजाए, पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य को मिटाने में लगी थी. हालांकि, उनकी पूरी बेरहमी ग्राम प्रधान के घर के पास में लगी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने दखल दिया है. अधिकारियों के निर्देश पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है. ताकि असली कारणों को पता लग पाए. डीएसपी प्रदीप त्रिपाठी ने घटनास्थल पर मौजूद पीआरवी कर्मियों की सूची तैयार कर ली गई है. मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए है.
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