विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या पुलिस के जांच अधिकारी को राम मंदिर दान चोरी मामले में पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने जांच के दायरे को और व्यापक करने की मांग की है. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है.

आलोक कुमार ने लिखा जांच अधिकारी को पत्र
राम मंदिर दान चोरी मामले में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या पुलिस के जांच अधिकारी DSP आशुतोष तिवारी को पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने जांच के दायरे को और व्यापक करने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि राम जन्मभूमि थाने में दर्ज की गई FIR की निष्पक्ष और बड़े स्तर पर तथ्यपरक जांच के लिए सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने वाले नेताओं के बयान भी दर्ज किए जाएं.
4 नेताओं के लिए नाम
आलोक कुमार ने पत्र में 4 प्रमुख नेताओं को सार्वजनिक बयानों का उल्लेख किया है. पत्र में प्रो. राम गोपाल यादव, अरविंद केजरीवाल, प्रियंका गांधी वाड्रा और सांसद संजय सिंह का जिक्र किया गया है. इन नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर राम मंदिर दान चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं. पत्र में कहा गया है कि अगर इन नेताओं ने इतने बड़े आरोप लगाए हैं, तो संभव है कि उनके पास कुछ तथ्य, दस्तावेज या फिर जानकारी हो.
पत्र में की मांग
पत्र में अयोध्या CO से मांग की गई है कि इन नेताओं से पूछताछ करके जानकारी ली जाए. पत्र में ये जानकारी लेने की मां की गई है-
उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है?
उनके पास यह जानकारी किन स्रोतों से मिली है?
क्या उनके पास आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज, रिकॉर्ड या कोई सबूत हैं?
प्रियंका गांधी के बयान का हवाला
पत्र में कहा गया है कि संजय सिंह SIT के सामने पेश हो चुके हैं और जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज भी सौंप चुके हैं. पत्र में प्रियंका गांधी के बयान का भी हवाला दिया गया है. उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या सिर्फ छोटे कर्मचारी ही सीसीटीवी बंद करके हजारों करोड़ों के दान में हेरफेर कर सकते हैं या फिर इसके पीछे कोई बड़ी भूमिका भी है.
कानूनी कार्रवाई की मांग
आलोक कुमार ने पत्र में लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति अपने आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री देता है तो जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलती है, लेकिन अगर जांच में पाया जाता है कि आरोप झूठे, लापरवाह या बिना किसी आधार पर लगाए गए हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए.
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