Sant rampal released hisar jail: हिसार की सेंट्रल जेल-2 में करीब 11 साल से उम्रकैद की सजा काट रहे सतलोक आश्रम प्रमुख संत रामपाल को शुक्रवार को देशद्रोह के एक मामले में जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया. 19 नवंबर 2014 को बरवाला हिंसा के बाद गिरफ्तार हुए रामपाल को हाईकोर्ट के आदेश और बेल बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेल से छुट्टी मिली है.

Sant rampal released hisar jail: हरियाणा के हिसार की सेंट्रल जेल-2 से संत रामपाल को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया. वह सतलोक आश्रम से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे. करीब 11 साल 4 महीने और 24 दिन जेल में रहने के बाद वह बाहर आए. बताया जा रहा है कि उन्हें देशद्रोह के एक मामले में जमानत मिलने के बाद यह रिहाई मिली है. लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत के आदेश के बाद ही जेल प्रशासन ने उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की.
जानकारी के अनुसार 8 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने संत रामपाल को देशद्रोह के केस में जमानत दे दी थी. अदालत के फैसले के बाद उनके वकीलों ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की. हत्या के दो अलग-अलग मामलों में 5-5 लाख रुपये के बेल बॉन्ड जमा कराए गए. सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद अदालत के आदेश के आधार पर उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया. इसके बाद शुक्रवार को वह हिसार की सेंट्रल जेल से बाहर निकल आए.
संत रामपाल को लेने के लिए उनके परिवार के सदस्य पहले से ही जेल के बाहर पहुंच गए थे. परिवार के लोग सात गाड़ियों के काफिले में वहां आए थे. जेल से बाहर निकलने के बाद रामपाल सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर गाड़ी में बैठकर वहां से रवाना हुए. गाड़ी के शीशों पर सफेद पर्दे लगे हुए थे. बताया गया कि जेल से बाहर निकलते समय उनके चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे रही थी. उनके समर्थक और परिवार के लोग भी वहां मौजूद थे.
यह पूरा मामला नवंबर 2014 से जुड़ा हुआ है. उस समय पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने संत रामपाल को कोर्ट की अवमानना के एक मामले में अदालत में पेश होने का आदेश दिया था. लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुए. इसके बाद 19 नवंबर 2014 को पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पहुंची. उस समय आश्रम में बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद थे.
पुलिस के पहुंचने पर आश्रम के अंदर हालात अचानक बिगड़ गए. पुलिस और समर्थकों के बीच टकराव हो गया. इस दौरान स्थिति काफी गंभीर हो गई और हिंसा फैल गई. इस घटना में महिलाओं और बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई थी. बाद में पुलिस ने संत रामपाल को गिरफ्तार कर लिया. साल 2018 में हिसार की अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी मानते हुए हत्या समेत कई धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. साथ ही उन पर देशद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया था. अब देशद्रोह के केस में जमानत मिलने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया है. हालांकि बाकी मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है.
