Satyawadi Rakshak Party: गुजरात की गुमनाम ‘सत्यवादी रक्षक पार्टी’ को दो साल में 416 करोड़ का चंदा मिला. चुनाव में सिर्फ एक उम्मीदवार उतारने वाली इस पार्टी के दफ्तर पर अब ताला लटका है और अध्यक्ष स्वातीबेन का कहना है कि पार्टी बंद हो चुकी है.

Satyawadi Rakshak Party: गुजरात से राजनीतिक चंदे को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां की एक गुमनाम पार्टी ‘सत्यवादी रक्षक पार्टी’ को करोड़ों रुपये का चंदा मिला है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस पार्टी को दो साल के भीतर 416 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड मिला है. हैरानी की बात यह है कि बिना किसी बड़े नेता या रैली के इतना बड़ा फंड जुटा लिया गया. इस खबर के सामने आते ही सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है.
330 करोड़ का चंदा और एक उम्मीदवार
देश की बड़ी-बड़ी पार्टियां चुनाव में चंदा जुटाने के लिए काफी मेहनत करती हैं. लेकिन इस छोटी सी पार्टी ने बिना किसी जनांदोलन के 2023-24 में 330 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा लिए. इससे पहले 2022-23 में भी पार्टी को करीब 85 करोड़ रुपये का फंड मिला था. इतने सारे पैसे मिलने के बावजूद पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक उम्मीदवार खड़ा किया था. यह बात किसी के गले से नीचे नहीं उतर रही है.
पार्टी दफ्तर पर लटका मिला ताला
जब इस बड़े चंदे की हकीकत जानने के लिए मीडिया की टीम पार्टी के दफ्तर पहुंची तो नजारा हैरान करने वाला था. चुनाव आयोग के कागजों में दर्ज पते पर सन्नाटा पसरा हुआ था. वहां मुख्य दरवाजे पर बड़ा सा ताला लटका मिला. आसपास के लोगों को भी इस पार्टी की गतिविधियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. जिस पार्टी के पास अरबों रुपये का फंड हो उसका दफ्तर इस हाल में होना कई सवाल खड़े करता है.
अध्यक्ष बोलीं- मैं तो बस नाम की प्रमुख हूँ
दफ्तर बंद मिलने के बाद जब टीम पार्टी की अध्यक्ष स्वातीबेन के घर पहुंची तो उन्होंने अजीबो-गरीब जवाब दिए. स्वातीबेन ने कैमरे के सामने माना कि वे सिर्फ नाम की अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी को अब बंद कर दिया गया है. 330 करोड़ रुपये के चंदे पर सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ खास पता नहीं है. उनका कहना था कि जो पैसा आया होगा उसे कहीं दान कर दिया गया होगा.
पैसा कहां गया किसी को खबर नहीं
अध्यक्ष के इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब ने मामले को और संदेहास्पद बना दिया है. स्वातीबेन का कहना था कि पैसा किसी की जेब में नहीं गया है बल्कि दान दे दिया गया है. हालांकि वह यह नहीं बता पाईं कि इतना बड़ा फंड किसे और क्यों दान किया गया. एक राजनीतिक पार्टी का इस तरह से करोड़ों रुपये का लेन-देन करना और फिर गायब हो जाना कानूनी नियमों के खिलाफ माना जाता है.
जांच एजेंसियों के रडार पर मामला
अब यह पूरा मामला गंभीर मोड़ ले चुका है. गुजरात की यह गुमनाम पार्टी और इसके पीछे के लोग जांच के घेरे में आ सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मामला पैसों की हेराफेरी या शेल कंपनियों से जुड़ा हो सकता है. चुनावी फंड के नाम पर हुए इस बड़े खेल की सच्चाई अब जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगी.
