UP Politics: शंकराचार्य शिष्य प्रकरण को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है. हाल ही में दिए गए बयान के बाद चर्चा में आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने सरकारी आवास पर बटुकों को आमंत्रित किया था और उन्हें पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर सम्मानित भी किया. इस दौरान डिप्टी सीएम ने बटुकों और पुरोहितों ने की संगमनगरी में शिखा खींचे जाने पर नाराजगी भी जताई और सख्त कार्रवाई की मांग की.
क्या कहा डिप्टी सीएम ने….
डिप्टी सीएम ने भरोसा दिया कि ब्राह्मण समाज या बटुकों का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि किसी की धार्मिक पहचान या परंपरा का अपमान अस्वीकार्य है और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी है.
क्या बोले शिवपाल यादव
इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने अपना रिएक्शन दिया. उन्होंने कहा कि “शंकराचार्य का जिस तरह अपमान हुआ, अब कितना भी ढोंग कर लें, उससे कोई फायदा नहीं होगा. सपा के वरिष्ठ नेता और विधायक शिवपाल सिंह यादव ने ब्रजेश पाठक पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि अगर ब्रजेश पाठक को इतना ही दुख है तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
वहीं कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा (मोना) ने भी बयान देते हुए कहा कि बटुकों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन किसी का अपमान नहीं होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि आपसी विरोधाभास खत्म करने में बीजेपी असफल रही है.
जानिए कब का है ये मामला?
इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और यह मुद्दा धार्मिक सम्मान बनाम राजनीतिक संदेश के रूप में प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज प्रशासन से विवाद विवाद 18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) के दिन का है, जब शंकराचार्य को उनके रथ को प्रशासन ने रोक लिया था. जिसके बाद मेला प्रशासन, पुलिस और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच टकराव हुआ. इसके बाद पुलिस द्वारा उन्हें और उनके साथ आए बटुकों (विद्यार्थियों) को संगम स्नान से रोकने व दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा. जिसके बाद वे 10 दिनों तक धरने पर रहे और 28 जनवरी 2026 को बिना स्नान किए वापस लौट गए.
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