TMC Political Crisis: पश्चिम बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ा सियासी विस्फोट हुआ है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने बागी रुख अपनाने वाले वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और युवा नेता सयानी घोष को उनके अहम पदों से हटाकर नए नेताओं को जिम्मेदारी सौंप दी है.
TMC Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान अब खुलकर सबके सामने आ गया है. पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के दो बहुत बड़े चेहरों पर बेहद सख्त कार्रवाई की है. ममता बनर्जी ने वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और युवा नेता सयानी घोष को उनके अहम पदों से तुरंत हटा दिया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद से ही पार्टी के अंदर असंतोष की चिंगारी सुलग रही थी, जो अब एक बड़े सियासी विस्फोट के रूप में बदल चुकी है.
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह शनिवार को नई दिल्ली में हुई एक सीक्रेट मीटिंग को माना जा रहा है. दरअसल टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और बीजेपी के केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच दिल्ली में एक बेहद अहम मुलाकात हुई थी. सुदीप बंद्योपाध्याय अपनी बागी साथी और सांसद शताब्दी रॉय के साथ बीजेपी नेता के घर पहुंचे थे. इस मुलाकात की खबर जैसे ही कोलकाता पहुंची, टीएमसी खेमे में खलबली मच गई. ममता बनर्जी ने बिना कोई वक्त गंवाए सुदीप बंद्योपाध्याय को नॉर्थ कोलकाता संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष पद से हटा दिया. उनकी जगह अब ममता के सबसे भरोसेमंद नेता कुणाल घोष को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है.
ममता बनर्जी का हंटर सिर्फ सुदीप बंद्योपाध्याय पर ही नहीं बल्कि पार्टी की तेजतर्रार युवा नेता सयानी घोष पर भी चला है. पार्टी ने सयानी घोष को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (AITC) के यूथ प्रेसिडेंट के पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है. सयानी घोष की जगह अब अर्नब बनर्जी को पार्टी का नया युवा अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इस कार्रवाई के बाद से टीएमसी के बागी धड़े के तेवर और ज्यादा तल्ख हो गए हैं. बागी सांसदों का गुट अब सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने की तैयारी में है. वे संसद में खुद को असली टीएमसी के तौर पर मान्यता देने की मांग उठाने वाले हैं.
टीएमसी के अंदर मचे इस घमासान के बीच पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है. पूर्व राज्य मंत्री डॉ. मानस रंजन भुनिया ने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने ममता बनर्जी को एक चिट्ठी लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. वहीं दूसरी तरफ बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने एक बड़ा दावा ठोक दिया है. उनका कहना है कि टीएमसी के कुल २८ लोकसभा सांसदों में से १९ सांसद पहले से ही उनके बागी गुट के साथ खड़े हैं. बागी गुट की एक और बड़ी नेता काकोली घोष ने तो यहाँ तक कह दिया है कि संसद से मान्यता मिलते ही उनका पूरा गुट बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन को अपना खुला समर्थन दे देगा.
पश्चिम बंगाल की राज्य विधानसभा में भी ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. वहाँ टीएमसी के कुल ८० विधायकों में से ६४ विधायक पहले ही पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं. इस बागी गुट ने विधानसभा के स्पीकर रथिंद्र बोस से अलग गुट के रूप में मान्यता भी हासिल कर ली है. इस नए गुट ने रिताब्रता बनर्जी को सदन में विपक्ष का नेता भी चुन लिया है. हालांकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने स्पीकर के इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जहाँ फिलहाल इस केस की कानूनी सुनवाई चल रही है. इस बीच सुदीप बंद्योपाध्याय के इस कदम पर टीएमसी के नए अध्यक्ष कुणाल घोष ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सुदीप की कुर्सी और लालच की वजह से ही टीएमसी ने अपने कई मजबूत नेताओं को खोया है.

