El Nino Climate Alert: मौसम विज्ञान विभागों ने प्रशांत महासागर में शक्तिशाली ‘अल-नीनो’ के सक्रिय होने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है. इसके कारण भारत में इस साल मॉनसून के सामान्य से केवल 90% रहने का अनुमान है, जिससे जुलाई-अगस्त में देश के 200 से अधिक जिलों में भारी सूखे और खरीफ फसलों के बर्बाद होने का बड़ा संकट मंडरा रहा है.

El Nino Climate Alert: भारत की खेती, अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर एक बार फिर सूखे का बड़ा संकट मंडराने लगा है. मौसम का सबसे खतरनाक दानव यानी ‘अल-नीनो’ प्रशांत महासागर में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है. अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘NOAA’ और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने ११ जून, २०२६ को आधिकारिक तौर पर इसके आने की पुष्टि कर दी है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ०.७ डिग्री सेल्सियस अधिक हो चुका है. इस संकट के कारण भारत में इस साल मॉनसून के अनुमान को घटाकर सिर्फ ९० प्रतिशत कर दिया गया है, जो साफ तौर पर कम बारिश और सूखे का संकेत है.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अल-नीनो प्रशांत महासागर में हर दो से सात साल के बीच पैदा होने वाली एक प्राकृतिक घटना है. स्पैनिश भाषा में इसका मतलब ‘छोटा बच्चा’ होता है. सामान्य दिनों में तेज हवाएं गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ लाती हैं, जिससे हमारे यहाँ अच्छी बारिश होती है. लेकिन अल-नीनो के आते ही ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. इसकी वजह से मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. समुद्र की यही गर्मी पूरी दुनिया के मौसम चक्र और हवाओं के पैटर्न को बुरी तरह बिगाड़ देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह साल १९५० के बाद से अब तक का सबसे शक्तिशाली और खतरनाक अल-नीनो साबित हो सकता है.
भारत पर इसका सबसे पहला और सीधा हमला मॉनसून के दौरान देखने को मिलेगा. जून के महीने में भले ही शुरुआत सामान्य दिख रही हो, लेकिन मुख्य महीनों यानी जुलाई और अगस्त में बारिश गायब हो सकती है. देश के मुख्य अनाज उत्पादक राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं. भारत के कई बड़े बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर पहले से ही काफी कम है. अगर जुलाई-अगस्त के जरूरी हफ्तों में पानी नहीं बरसा, तो धान, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी खरीफ फसलों की बुआई पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी. इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने करीब २०० जिलों के किसानों के लिए खास एडवाइजरी जारी कर दी है.
इस बार अल-नीनो के साथ ग्लोबल वार्मिंग की ‘कातिल जोड़ी’ भी मिल गई है. प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल के अंधाधुंध इस्तेमाल से धरती पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर गर्म चल रही है. ऐसे में इस ‘सुपर अल-नीनो’ का आना जलती आग में घी डालने जैसा काम करेगा. वैज्ञानिकों के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब अल-नीनो की घटनाएं पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी और लगातार होने लगी हैं. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने भी पूरी दुनिया को चेताया है. उन्होंने कहा है कि अगर इस मौसम चक्र को रोकना है, तो दुनिया को तत्काल कोयले और पेट्रोल पर अपनी निर्भरता खत्म करनी होगी.
अल-नीनो का यह कहर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका वैश्विक असर पूरी दुनिया को डरा रहा है. इसके कारण दुनिया भर में मौसम के दो सबसे खतरनाक रूप देखने को मिलेंगे. एक तरफ इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेज़न के जंगलों में भयंकर अकाल और सूखा पड़ेगा. मध्य अमेरिका का ‘ड्राई कॉरिडोर’ पहले ही भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका है, जहाँ ग्वाटेमाला सरकार ने अभी से ११ लाख राशन पैकेट बांटने की तैयारी शुरू कर दी है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों और दक्षिण अमेरिका के तटीय इलाकों में इसके कारण विनाशकारी बाढ़ और चक्रवात आएंगे. कुल मिलाकर यह स्थिति दुनिया भर में अनाज का बड़ा संकट पैदा कर सकती है.
