लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को दोबारा हासिल करने और ‘आधी आबादी’ को अपने पाले में लाने के लिए कांग्रेस ने एक बड़ी और रणनीतिक योजना तैयार की है. साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस इस बार भी महिला प्रत्याशियों को भारी संख्या में चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है. इसके तहत कांग्रेस इस बार भी तमाम महिला प्रत्याशियों को चुनाव में टिकट देने की तैयारी कर रही है.
हर विधानसभा क्षेत्र के पैनल में होगी एक महिला अनिवार्य
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बार कांग्रेस बेहद खास रणनीति पर काम कर रही है. आगामी चुनाव में हर विधानसभा क्षेत्र से तैयार होने वाले संभावित उम्मीदवारों के पैनल में कम से कम एक महिला प्रत्याशी का नाम अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा. सूत्रों के अनुसार इस बार हर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारों के पैनल में कम से कम एक महिला को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा.
कांग्रेस की योजना प्रदेश की करीब 35 फीसदी सीटों पर सीधे महिला उम्मीदवार उतारने की है. कांग्रेस प्रवक्ता रत्ना पांडेय के अनुसार, सियासी मैदान में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाने वाली महिलाओं को इस बार प्राथमिकता दी जाएगी और इसके लिए जमीनी स्तर पर रणनीतियां बननी शुरू हो चुकी हैं.
जल्द शुरू होगी उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग
पार्टी के भीतर योग्य और जिताऊ उम्मीदवारों की पहचान के लिए जल्द ही स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी. यह स्क्रीनिंग बेहद कड़े पैमानों पर आधारित होगी, जिसमें मुख्य रूप से महिला दावेदारों की जनता के बीच विश्वसनीयता, उनकी सामाजिक पकड़ और जमीनी स्तर पर संगठन के लिए किए गए उनके कार्यों का गहराई से मूल्यांकन किया जाएगा.
2022 के झटके से सीख
हालांकि, कांग्रेस के लिए यह राह इतनी आसान नहीं मानी जा रही है. साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था और पार्टी के बेहद चर्चित नारे ”लड़की हूं, लड़ सकती हूं” का जादू भी मतदाताओं पर नहीं चल सका था [cite: हालांकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में अपनी राजनीतिक जमीन खो चुकी कांग्रेस को न केवल बड़ा झटका लगा था बल्कि उसके ”लड़की हूं, लड़ सकती हूं” के नारे की भी हवा निकल गई थी. 2022 के चुनाव में कांग्रेस ने रिकॉर्ड 148 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था, लेकिन उनमें से केवल एक प्रत्याशी—कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’—ही अपनी सीट बचा पाने में कामयाब रही थीं.
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