akhilesh sanatan samajwad: यूपी चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव ने सीएम योगी से नाराज चल रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर ‘सनातन और समाजवाद’ का नया नारा दिया है, ताकि राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर बीजेपी को घेरा जा सके.

akhilesh sanatan samajwad: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक बहुत ही दिलचस्प केमिस्ट्री देखने को मिल रही है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव आजकल ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के काफी करीब आ गए हैं. अखिलेश को शंकराचार्य की मौजूदा राजनीतिक लाइन अपने एजेंडे के लिए बिल्कुल फिट लग रही है. इसी सिलसिले में उन्होंने लखनऊ पहुंचे शंकराचार्य से खास मुलाकात की और सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि “जो सनातन है, वही समाजवाद है.” दरअसल, शंकराचार्य प्रयागराज महाकुंभ के समय से ही सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से काफी नाराज चल रहे हैं. अखिलेश इसी मौके का पूरा सियासी फायदा उठाने की कोशिश में जुटे हैं.
राम मंदिर चढ़ावे पर बड़ा हमला
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से करीब आधे घंटे की मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया के सामने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी विवाद को लेकर कहा कि हमारे धर्म में चढ़ावे की चोरी सबसे बड़ा महापाप है. बीजेपी ने यह महापाप किया है और अब उनमें आपसी भगदड़ शुरू हो गई है. अखिलेश ने इस मामले की जांच कर रही एसआईटी टीम पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि चोरों को पकड़ने के बजाय कुछ लोग नसीहत दे रहे हैं, जिससे साफ है कि उनकी कोई न कोई राजनीतिक मजबूरी जरूर है.
योगी बनाम शंकराचार्य की जंग
अविमुक्तेश्वरानंद और सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच का यह विवाद काफी पुराना और गहरा है. प्रयागराज माघ मेले में जब पुलिस ने शंकराचार्य के रथ को रोक दिया था, तब वे बिना स्नान किए ही धरने पर बैठ गए थे और बाद में वाराणसी लौट गए थे. उस समय शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी को सनातन के लिए बेहद खराब बताया था. इसके जवाब में सीएम योगी ने भी एक कार्यक्रम में बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ शब्द का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा था कि कुछ लोग धर्म की आड़ लेकर सनातन को लगातार कमजोर करने का काम कर रहे हैं.
पुराने जख्मों पर लगा मरहम
आज भले ही अखिलेश यादव और शंकराचार्य एक ही पाले में खड़े दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इतिहास कुछ और ही कहानी कहता है. साल 2015 में जब बनारस में गंगा नदी में मूर्ति विसर्जन को लेकर आंदोलन हुआ था, तब पुलिस ने संतों पर जमकर लाठियां बरसाई थीं. खास बात यह है कि उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की ही सरकार थी. लेकिन राजनीति में नए समीकरण बनाने के लिए अक्सर पुराने गिले शिकवे भुला दिए जाते हैं. अब समाजवादी पार्टी पूरी तरह से शंकराचार्य के गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने वाले धर्मयुद्ध के समर्थन में खड़ी नजर आ रही है.
यूपी चुनाव पर टिकी हैं नजरें
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव बिल्कुल करीब हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि ये चुनाव इसी साल के आखिर में या 2027 की शुरुआत में हो सकते हैं. ऐसे में बीजेपी विरोधी वोटों को एकजुट करने और खुद पर लगे ‘सनातन विरोधी’ के टैग को हटाने के लिए अखिलेश के लिए यह मुलाकात संजीवनी जैसी है. कुछ समय पहले उनकी पत्नी डिंपल यादव ने भी शंकराचार्य से मिलकर कन्नौज में हुए उनके अपमान के लिए माफी मांगी थी. अब देखना यह है कि शंकराचार्य के आशीर्वाद और सनातन समाजवाद के इस नए गठजोड़ से अखिलेश यादव को चुनाव में कितना फायदा मिलता है.
