Pete heagseth warning to iran: अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि उसने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका अपने सैन्य हमले और तेज कर देगा. उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए नाटो देशों से सहयोग न मिलने पर नाराजगी जताई और संकेत दिया कि ईरान के तेल ठिकानों पर सीधे हमले किए जा सकते हैं.

Pete heagseth warning to iran: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है. खासतौर पर तेल की सप्लाई पर इसका बड़ा असर दिखाई दे रहा है. होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से तेल की आवाजाही बाधित हो गई है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं. इसी बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा है कि ईरान को अमेरिका के साथ समझौता कर लेना चाहिए. अगर वह ऐसा नहीं करता है तो अमेरिका हमलों को और तेज कर सकता है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका पिछले एक महीने से इस जंग को खत्म करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि बातचीत के जरिए समाधान निकले. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी समझौता करने के पक्ष में हैं. उनका मानना है कि अगर दोनों पक्ष बातचीत से रास्ता निकाल लें तो इस संघर्ष को रोका जा सकता है. हेगसेथ ने यह भी कहा कि ईरान की नई सरकार को हालात को समझदारी से संभालना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ईरान में मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में बनी नई सरकार को पहले की सरकार से ज्यादा समझदारी दिखानी चाहिए. अमेरिका का मानना है कि नई सरकार के पास स्थिति को संभालने का मौका है. अगर वह बातचीत के लिए तैयार होती है तो युद्ध को जल्द खत्म किया जा सकता है. लेकिन अगर ईरान ने समझौते से इनकार किया तो अमेरिका के पास और भी कई विकल्प मौजूद हैं.
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि यह जंग अब दूसरे महीने में पहुंच चुकी है. लगातार हो रहे हमलों से ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के कारण ईरान का मनोबल भी गिरा है. हेगसेथ के अनुसार अमेरिका के पास अभी भी कई सैन्य विकल्प हैं. जबकि ईरान के पास जवाब देने के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं.
हेगसेथ ने यह भी कहा कि होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते की सुरक्षा केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है. दुनिया के अन्य देशों को भी इसमें योगदान देना चाहिए. उन्होंने **नाटो के कुछ देशों पर आरोप लगाया कि जब अमेरिका ने मदद मांगी तो कई देश साथ नहीं आए. इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप भी कह चुके हैं कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता है तो उसके तेल ठिकानों पर चुन-चुनकर हमले किए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जो देश तेल संकट की बात कर रहे हैं, वे या तो अमेरिका से तेल खरीदें या फिर खुद होर्मुज जाकर तेल लाने की हिम्मत दिखाएं.
