India-Russia Oil Trade: अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर दी गई छूट 16 मई को समाप्त हो रही है, इसी बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत को निरंतर तेल आपूर्ति का भरोसा दिया है. लावरोव ने ऊर्जा नियंत्रण को लेकर अमेरिका की नीतियों की आलोचना की और भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया है.

India-Russia Oil Trade: अमेरिका की तरफ से भारत को रूसी तेल खरीदने पर दी गई छूट 16 मई को खत्म होने वाली है. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर भारत और रूस के रिश्तों पर टिकी हुई है. इसी बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने साफ कहा कि भारत ने जब भी रूस से तेल मांगा, रूस ने हमेशा सप्लाई दी. उनके इस बयान के बाद तेल बाजार और कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. लोगों के मन में सवाल उठने लगा है कि क्या आगे भी भारत को पहले की तरह रूसी तेल मिलता रहेगा या सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
रूस के विदेश मंत्री BRICS देशों की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे. यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में लावरोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई है. इसमें ऊर्जा, निवेश, परिवहन और उर्वरक सप्लाई जैसे बड़े मुद्दे शामिल रहे. उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने पर भी काम चल रहा है. साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी बातचीत हुई.
जब उनसे भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसके आंकड़े सबके सामने हैं. रूस ने हमेशा भारत की जरूरत के हिसाब से तेल भेजा है. लावरोव ने कहा कि यह फैसला सिर्फ रूस का नहीं होता. इसमें भारतीय कंपनियों और खरीदारों की भूमिका भी अहम रहती है. उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय साझेदारों ने ऑर्डर दिया, रूस ने सप्लाई देने से इनकार नहीं किया. इस बयान को भारत के लिए भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव पर भी चर्चा हुई. लावरोव ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में संकट ईरान की वजह से शुरू नहीं हुआ. उनका कहना था कि 28 फरवरी से पहले वहां जहाज पूरी तरह सुरक्षित गुजर रहे थे. उन्होंने अमेरिका और इजरायल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि असली संघर्ष तेल और ऊर्जा नियंत्रण को लेकर है. उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी तेल हितों को लेकर आक्रामक रवैया अपनाता रहा है.
रूस के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि भारत फिलहाल ऊर्जा सप्लाई को लेकर रूस के साथ अपने रिश्ते मजबूत बनाए रखना चाहता है. हालांकि अमेरिका की छूट खत्म होने के बाद आगे क्या स्थिति बनेगी, इस पर अभी पूरी तरह तस्वीर साफ नहीं है. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और सस्ते रूसी तेल ने पिछले कुछ समय में भारत को बड़ी राहत दी है. अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका आगे छूट बढ़ाता है या भारत को नए विकल्प तलाशने पड़ते हैं.
