Oil and Gas Supply News: सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लंबे समय तक रुकावट से दुनिया 1970 के दशक जैसी आर्थिक मंदी और भारी महंगाई की चपेट में आ सकती है. तेल की कीमतों में 50% की वृद्धि और सप्लाई चेन बाधित होने से एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर सबसे गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है.

Oil and Gas Supply News: सिंगापुर के प्रधानमंत्री Lawrence Wong ने दुनिया को एक बड़े आर्थिक खतरे को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा. तो पूरी दुनिया में गंभीर असर देखने को मिल सकता है. खासतौर पर एशियाई देशों पर इसका सबसे ज्यादा दबाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बन सकते हैं जैसे 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान बने थे. उस समय दुनिया ने भारी महंगाई और आर्थिक मंदी का सामना किया था.
प्रधानमंत्री वोंग ने अपने बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले दो महीनों से प्रभावित है. इसकी वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है. एशिया के कई देश खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं. ऐसे में वहां ईंधन की कमी बढ़ने लगी है. कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगा हो चुका है. लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर दिखाई देने लगा है.
उन्होंने कहा कि संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा. इसका असर खाने-पीने की चीजों और खेती पर भी पड़ सकता है. उर्वरक और जरूरी सामान की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है. कई एयरलाइंस ने उड़ानें कम करनी शुरू कर दी हैं. वहीं कुछ फैक्ट्रियों में उत्पादन धीमा पड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं. यानी आने वाले समय में कई जरूरी चीजों की कमी देखने को मिल सकती है. इससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर होर्मुज फिर से खुल भी जाता है. तब भी हालात तुरंत सामान्य नहीं होंगे. उनका कहना है कि समुद्री रास्तों और बंदरगाहों को काफी नुकसान पहुंचा है. जहाजों की आवाजाही दोबारा सुरक्षित बनाने में समय लगेगा. बीमा कंपनियों और शिपिंग कंपनियों का भरोसा लौटाना भी आसान नहीं होगा. इसलिए पूरी व्यवस्था को पटरी पर आने में कई महीने लग सकते हैं.
वोंग ने साफ कहा कि यह संकट कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने 1970 के दशक का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय दुनिया ने “स्टैगफ्लेशन” का सामना किया था. यानी महंगाई भी बढ़ी थी और आर्थिक विकास भी रुक गया था. अभी भी वैसा ही खतरा बनता दिख रहा है. ईरान युद्ध के बाद पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है. इसी वजह से दुनिया भर के बाजारों में चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
