HC on Contempt: दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में जज के खिलाफ ‘सुनियोजित अभियान’ चलाने के आरोप में अरविंद केजरीवाल समेत 5 आप नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की साख गिराने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह मामला संविधान के प्रति जवाबदेही का है.

HC on Contempt: दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को शराब नीति मामले में बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने आम आदमी पार्टी के पांच नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है. इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा का नाम शामिल है. यह मामला दिल्ली शराब नीति केस से जुड़ा है. जिसकी सुनवाई अब तक जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच कर रही थी. हालांकि अब मुख्य केस की सुनवाई दूसरी बेंच को सौंप दी गई है. जबकि अवमानना से जुड़े मामले की सुनवाई जस्टिस शर्मा ही करेंगी.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई. कोर्ट के मुताबिक यह कोई सामान्य आलोचना नहीं थी. बल्कि एक सुनियोजित अभियान था. अदालत ने कहा कि जज की छवि खराब करने के लिए वीडियो. चिट्ठियां और रिकॉर्डिंग फैलाए गए. यहां तक कि उनके परिवार को भी विवाद में घसीटा गया. कोर्ट ने माना कि यह न्यायपालिका की साख को कमजोर करने की कोशिश थी. जस्टिस शर्मा ने कहा कि अदालत के बाहर चल रही इस मुहिम ने उन्हें काफी चिंतित किया.
कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की टिप्पणियों पर भी सख्त रुख अपनाया. अदालत ने कहा कि केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जिससे लोगों का भरोसा अदालत से हटे. जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर उन्हें फैसले से आपत्ति थी तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकते थे. लेकिन उन्होंने वीडियो जारी कर अदालत पर सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि किसी नेता को यह अधिकार किसने दिया कि वह तय करे कौन सी अदालत किस मामले की सुनवाई कर सकती है. जस्टिस शर्मा ने साफ कहा कि वह किसी दबाव या डर के आगे झुकने वाली नहीं हैं.
अदालत ने यह भी कहा कि फैसलों की आलोचना करना गलत नहीं है. लेकिन किसी जज के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान चलाना पूरी तरह गलत है. कोर्ट के मुताबिक न्यायपालिका जनता के भरोसे पर चलती है. अगर उस भरोसे को तोड़ने की कोशिश होगी तो अदालत सख्त कदम उठाएगी. जस्टिस शर्मा ने कहा कि राजनेताओं के पास बड़ी संख्या में फॉलोअर होते हैं. इसलिए उनके बयान का असर भी ज्यादा होता है. जबकि जज सार्वजनिक मंचों पर जाकर अपना बचाव नहीं कर सकते.
इस पूरे मामले के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई की प्रक्रिया में बदलाव किया है. अब शराब नीति केस की मुख्य सुनवाई दूसरी बेंच करेगी. जबकि अवमानना से जुड़ी कार्रवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चलेगी. फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि सत्य की जीत हुई है. वहीं अदालत ने साफ कहा कि वह केवल संविधान के प्रति जवाबदेह है और किसी राजनीतिक दबाव में काम नहीं करेगी.
