Why Houthi fighters chew Khat leaves: यमन के हूती लड़ाकों और आम नागरिकों की तस्वीरों में अक्सर उनके गाल फूले हुए नजर आते हैं. वे मुंह में ‘खात’ (Khat) नामक पौधे की हरी पत्तियां दबाकर रखते हैं, जिसका असर मस्तिष्क पर एक उत्तेजक पदार्थ जैसा होता है. जानिए खात पत्तियों का सामाजिक, शारीरिक और यमन के जल संकट से जुड़ा सच.

Why Houthi fighters chew Khat leaves: यमन के हूती लड़ाकों की तस्वीरें जब भी दुनिया के सामने आती हैं, तो एक बात लोगों का ध्यान खींचती है. लड़ाकों का एक गाल बहुत ज्यादा फूला हुआ नजर आता है. ऐसा लगता है जैसे उन्होंने मुंह के अंदर कोई बड़ी चीज ठूंस रखी हो. कई तस्वीरों में उनके मसूड़ों के बीच हरी पत्तियां दबी हुई दिखती हैं. दरअसल ये कोई आम पत्तियां या खाने की चीज नहीं हैं. इसे ‘खात’ या ‘क़ात’ का पौधा कहा जाता है. यमन के लोग और हूती लड़ाके इन पत्तियों का गुच्छा बनाकर अपने गाल के एक कोने में दबाकर रखते हैं.
क्या होती हैं खात की पत्तियां और कैसे होता है इसका असर
खात एक झाड़ीदार पौधे की कोमल पत्तियां और टहनियां होती हैं. इन्हें निगला नहीं जाता, बल्कि धीरे-धीरे चबाया जाता है. मुंह के एक तरफ पत्तियों का गोला बनाकर दबाने से इनका रस लार के जरिए शरीर में पहुंचता है. इन पत्तियों में साइकोएक्टिव केमिकल पाया जाता है. इसका असर एक तरह के नशीले और उत्तेजक पदार्थ जैसा होता है. पत्तियों को चबाने के आधे से एक घंटे के अंदर दिमाग और नर्वस सिस्टम तेजी से काम करने लगता है. इससे व्यक्ति खुद को ज्यादा अलर्ट और ऊर्जावान महसूस करने लगता है.
थकान मिटाने और लंबे समय तक जागने के लिए करते हैं इस्तेमाल
खात चबाने से शरीर में अचानक फुर्ती और उत्साह आ जाता है. यही वजह है कि यमन में लोग इसे थकान दूर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. युद्ध के मैदान में तैनात हूती लड़ाके लंबे समय तक जागने और सक्रिय रहने के लिए इन्हें मुंह में दबाए रखते हैं. हालांकि इसका असर खत्म होते ही व्यक्ति को बेचैनी, नींद न आना और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं होने लगती हैं. बहुत लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से शरीर को इसकी आदत पड़ जाती है, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.
हूती ही नहीं, यमन के आम लोगों की भी है यह पुरानी आदत
यह बात समझना जरूरी है कि खात केवल हूती लड़ाकों की पसंद नहीं है. यमन के समाज में खात चबाने की परंपरा सदियों पुरानी है. वहां लगभग 90 प्रतिशत पुरुष और 73 प्रतिशत महिलाएं खात का इस्तेमाल करती हैं. दोपहर या शाम के समय लोग आपस में बैठकर बातें करते हैं और खात चबाते हैं. यह यमन की रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है. हूती लड़ाके भी इसी समाज से आते हैं, इसलिए उनकी तस्वीरों में गाल फूले हुए और मुंह में पत्तियां दबी नजर आती हैं.
खात की वजह से यमन में पैदा हो गया है बड़ा पानी संकट
खात की कहानी सिर्फ नशा या परंपरा तक सीमित नहीं है. इसका एक बहुत खतरनाक पहलू यमन के जल संकट से जुड़ा हुआ है. खात के पौधों को उगाने में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है. यमन में खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले कुल पानी का एक बड़ा हिस्सा खात की फसल में चला जाता है. राजधानी सना के पास पानी का स्तर इतनी तेजी से गिर रहा है कि कुओं को 700 मीटर से भी ज्यादा गहरा खोदना पड़ रहा है. यानी जिस आदत को लोग मनोरंजन मानते हैं, वही देश के पानी को खत्म कर रही है.
युद्ध से परे यमन की सामाजिक पहचान बन चुका है खात
खात की पत्तियों को सिर्फ जंग या हमले से जोड़कर देखना पूरी सच्चाई नहीं होगी. हूती लड़ाकों के लिए यह लड़ाई के दौरान अपनी थकान मिटाने का एक जरिया हो सकता है. लेकिन आम यमनी नागरिक के लिए यह उनके सामाजिक जुड़ाव का माध्यम है. यही कारण है कि यमन से आने वाले हर दूसरे फोटो और वीडियो में आपको लोगों के गाल में खात का गोला फंसा दिखाई दे जाएगा. यह परंपरा यमन की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और गंभीर जल संकट तीनों से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है.
