parliament special session: केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने के लिए तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए जाएंगे। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 की जा सकती हैं, जिसे लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है.

parliament special session: देश की राजनीति में इन दिनों महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. बिहार में नई सरकार बनने के बाद अब 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है. यह सत्र तीन दिन यानी 16, 17 और 18 अप्रैल तक चलेगा. इस दौरान केंद्र सरकार तीन अहम संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है. इनमें संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल शामिल हैं. इनका मकसद महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से लागू करना बताया जा रहा है. सरकार ने इन विधेयकों का ड्राफ्ट पहले ही सभी सांसदों को भेज दिया है.
महिला आरक्षण कानून के लागू होने के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है. रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा में सीटें 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती हैं. इनमें से लगभग 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित बताई जा रही हैं. इस कानून के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. जानकारी के अनुसार बढ़ाई जाने वाली सीटों का बड़ा हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकता है. यानी 300 से ज्यादा सीटें महिलाओं के खाते में जा सकती हैं. सरकार का कहना है कि इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ेगी.
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इस मुद्दे पर सभी दलों से समर्थन मांगा है. उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखा है. अपने पत्र में उन्होंने कहा कि यह सत्र देश के लोकतंत्र को मजबूत करने का अवसर है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए महिलाओं की बड़ी और सक्रिय भूमिका जरूरी है. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी एक पोस्ट करके लोगों से अपील की है. उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे अपने सांसदों को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करें.
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं. कुछ नेताओं ने इसका समर्थन किया है. वहीं कई दल इसका विरोध भी कर रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी की नेता Mayawati और पूर्व राष्ट्रपति Pratibha Patil ने महिला आरक्षण के विचार का समर्थन किया है. लेकिन कांग्रेस सहित दक्षिण भारत के कई नेता परिसीमन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने भी इस पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि बिना राज्यों से सलाह किए परिसीमन करना सही नहीं है.
दक्षिण भारत के नेताओं को डर है कि नई जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ने से उत्तर भारत के राज्यों को ज्यादा फायदा मिल सकता है. इससे संसद में राजनीतिक संतुलन बदल सकता है. इसी कारण कई विपक्षी दल सरकार से इस मुद्दे पर पहले चर्चा करने की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी कहा है कि महिला आरक्षण कानून को संसद से पास हुए काफी समय हो चुका है. लेकिन सरकार अब जल्दबाजी में कदम उठा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्ष इस प्रस्ताव का विरोध करता है तो उसे महिला विरोधी बताया जा सकता है. वहीं अगर बिल पास हो जाता है तो इसका राजनीतिक फायदा सरकार को मिल सकता है.
