us iran economic war: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे सैन्य हमले के बजाय ईरान के तेल निर्यात को रोककर उसे आर्थिक रूप से कमजोर करने की रणनीति अपनाई है. समुद्री नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल स्टोरेज तेजी से भर रहा है, जिससे उसे अपने तेल कुओं को स्थायी रूप से बंद करने का जोखिम उठाना पड़ सकता है.

us iran economic war: अमेरिका और Iran के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नई रणनीति सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी. पहली नजर में यह फैसला तनाव कम करने की कोशिश जैसा लगा. लेकिन कुछ ही समय बाद साफ हो गया कि इसके पीछे एक अलग रणनीति काम कर रही है. अमेरिका अब सीधे सैन्य हमले की बजाय आर्थिक दबाव के जरिए ईरान को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. इसलिए इस कदम को कई विशेषज्ञ “आर्थिक युद्ध” की शुरुआत मान रहे हैं.
दरअसल अमेरिका ने ईरान के तेल व्यापार पर दबाव बढ़ाने की योजना बनाई है. अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent के बयान से यह रणनीति साफ हो गई. उन्होंने कहा कि समुद्री रास्तों पर सख्ती जारी रहेगी. खासतौर पर Kharg Island से निकलने वाले तेल पर नजर रखी जा रही है. यह जगह ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है. अगर यहां से तेल बाहर नहीं जा पाएगा तो ईरान की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा. इसी कारण अमेरिका बंदरगाहों और समुद्री रास्तों पर दबाव बनाए रखना चाहता है.
इस बीच पाकिस्तान भी दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान चाहता है कि नए दौर की वार्ता शुरू हो. लेकिन ईरान ने साफ कहा था कि बातचीत से पहले समुद्री नाकेबंदी हटाई जानी चाहिए. अमेरिका ने युद्धविराम तो बढ़ा दिया, लेकिन नाकेबंदी नहीं हटाई. इससे साफ संकेत मिला कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना चाहता है. माना जा रहा है कि ईरान के अंदर भी नेतृत्व के स्तर पर मतभेद हैं. इसी स्थिति का फायदा उठाकर अमेरिका उस पर और दबाव बनाना चाहता है.
विश्लेषकों के अनुसार ईरान के सामने सबसे बड़ी समस्या तेल भंडारण की है. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के पास जमीन पर लगभग 50 से 55 मिलियन बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है. इसमें से करीब 60 प्रतिशत स्टोरेज पहले ही भर चुका है. ईरान रोजाना लगभग 1.5 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल पैदा कर रहा है. अगर तेल जहाजों के जरिए बाहर नहीं जा पाएगा तो कुछ ही दिनों में स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर सकते हैं. ऐसी स्थिति में ईरान को मजबूर होकर अपने तेल उत्पादन को रोकना पड़ सकता है.
तेल विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कुएं बंद करना आसान नहीं होता. जब उत्पादन बंद किया जाता है तो कुओं के अंदर दबाव कम हो सकता है. कई बार पानी अंदर घुस जाता है और चट्टानों की बनावट खराब हो जाती है. इससे दोबारा उत्पादन शुरू करना मुश्किल हो जाता है. ईरानी विश्लेषक Meir Javedanfar का कहना है कि भारी कच्चा तेल पाइपलाइन में जम सकता है और सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए माना जा रहा है कि अमेरिका की यह रणनीति ईरान की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर डाल सकती है.
