new york times pakistan shia anger report: न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट ‘Shia Anger in Pakistan’ को पाकिस्तान के प्रिंट संस्करणों से हटा दिया गया है, जिसमें देश के बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और आर्मी चीफ की शिया धर्मगुरुओं के साथ बैठक का खुलासा किया गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि 3.5 करोड़ शिया आबादी के गुस्से और ईरान-अमेरिका संबंधों के बीच पाकिस्तान अपनी अस्थिरता को दुनिया से छिपाना चाहता है.

new york times pakistan shia anger report: The New York Times ने हाल ही में पाकिस्तान की अंदरूनी स्थिति पर एक अहम रिपोर्ट प्रकाशित की. इस रिपोर्ट में खास तौर पर पाकिस्तान में रहने वाले शिया मुसलमानों के बढ़ते गुस्से और तनाव का जिक्र किया गया था. यह खबर अमेरिका और दुनिया के कई देशों में प्रकाशित हुई. लेकिन जब पाकिस्तान में छपने वाले अखबार के संस्करण की बात आई, तो यह रिपोर्ट वहां से हटा दी गई. यानी पाकिस्तान में बिकने वाली कॉपी में यह खबर दिखाई ही नहीं दी. इससे यह मामला काफी चर्चा में आ गया.
इस बारे में जानकारी Ellen Peltier ने दी, जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए ब्यूरो प्रमुख हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह रिपोर्ट दुनिया भर में प्रकाशित हुई, लेकिन पाकिस्तान के प्रिंट संस्करण से इसे हटा दिया गया. बताया गया कि यह रिपोर्ट पाकिस्तान के भीतर शिया और सुन्नी समुदायों के बीच संभावित तनाव को दिखाती है. इसी वजह से इसे संवेदनशील मानते हुए वहां प्रकाशित नहीं किया गया.
दरअसल यह रिपोर्ट पाकिस्तान के ही पत्रकार Zia ur Rehman ने लिखी थी. वे एक फ्रीलांस लेखक हैं और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए लिखते हैं. उनकी रिपोर्ट का शीर्षक था “शिया एंगर इन पाकिस्तान”. इस रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने हाल ही में शिया धर्मगुरुओं की एक बैठक बुलाई थी. इस बैठक का उद्देश्य शिया समुदाय के गुस्से को शांत करना था. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने धर्मगुरुओं से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश की कि हालात नियंत्रण में हैं और किसी तरह का बड़ा टकराव नहीं होने दिया जाएगा.
रिपोर्ट में पाकिस्तान की एक और बड़ी मुश्किल का भी जिक्र किया गया था. बताया गया कि इस समय पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है. दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क कम हैं. इसलिए पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है. लेकिन दूसरी ओर देश के अंदर ही सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अंदर हालात अस्थिर हैं तो बाहर शांति की पहल कितनी प्रभावी हो सकती है. यही बात इस रिपोर्ट में विस्तार से समझाई गई थी.
पाकिस्तान में शिया मुसलमानों की संख्या भी काफी बड़ी है. अनुमान के मुताबिक देश में करीब 3.5 करोड़ शिया रहते हैं. पिछले कुछ समय में इस समुदाय के बीच नाराजगी बढ़ी है. इसकी एक वजह ईरान में शीर्ष धार्मिक नेताओं की हत्या की घटनाएं भी बताई जा रही हैं. इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में शिया समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए. सरकार को डर है कि अगर यह गुस्सा और बढ़ा तो हालात बिगड़ सकते हैं. यही वजह मानी जा रही है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखी गई रिपोर्ट को पाकिस्तान में प्रकाशित होने से रोक दिया गया.
