up yogi cabinet expansion: योगी सरकार के दूसरे कैबिनेट विस्तार में मनोज पांडेय और भूपेंद्र चौधरी समेत 6 नए चेहरों को जगह मिली है, जिसमें जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को विशेष प्राथमिकता दी गई है. इस फेरबदल के जरिए भाजपा ने पूर्वांचल से पश्चिम यूपी तक दलित और पिछड़े वर्गों को साधकर अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है.

up yogi cabinet expansion: उत्तर प्रदेश में रविवार को योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा कैबिनेट विस्तार हुआ. लखनऊ में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में छह नए चेहरों ने मंत्री पद की शपथ ली. यह कार्यक्रम जनभवन में आयोजित किया गया. नए मंत्रियों में मनोज पांडेय, भूपेंद्र चौधरी, सुरेंद्र दिलेर, कैलाश राजपूत, कृष्णा पासवान और हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं. इसके अलावा सरकार में पहले से राज्य मंत्री रहे सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल के कद में भी बढ़ोतरी की गई है. बताया जा रहा है कि दोनों को अब ज्यादा अहम जिम्मेदारी मिल सकती है.
शपथ ग्रहण से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मुलाकात की थी. इसी दौरान नए मंत्रियों की सूची सौंपी गई. योगी सरकार में पहले से छह मंत्री पद खाली चल रहे थे. अब इन पदों को भरकर सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों और समाजों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है. इस विस्तार को आने वाले चुनावों और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. खास बात यह रही कि इस बार पश्चिम यूपी, पूर्वांचल, दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को ज्यादा महत्व मिला.
कैबिनेट में शामिल किए गए मनोज पांडेय सबसे ज्यादा चर्चा में रहे. वह पहले समाजवादी पार्टी में बड़े नेता माने जाते थे और अखिलेश यादव के करीबी थे. मनोज पांडेय रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं. लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था. इसके बाद उन्होंने खुलकर सपा के खिलाफ बयान दिए थे. भाजपा ने उन्हें ब्राह्मण चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया है. वहीं जाट समाज के बड़े नेता भूपेंद्र चौधरी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है. वह पश्चिम यूपी में भाजपा का मजबूत चेहरा माने जाते हैं और पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं.
दलित और पिछड़े वर्ग को साधने के लिए भी भाजपा ने कई नए चेहरे शामिल किए हैं. फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान को मंत्री बनाया गया है. वह पासी समाज की प्रमुख महिला नेता मानी जाती हैं. वहीं वाराणसी से जुड़े हंसराज विश्वकर्मा को भी कैबिनेट में जगह मिली है. वह विश्वकर्मा समाज और अति पिछड़े वर्ग में अच्छी पकड़ रखते हैं. भाजपा उन्हें पूर्वांचल का अहम चेहरा मानती है. लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने का फायदा उन्हें मिला है.
इसके अलावा वाल्मीकि समाज के नेता सुरेंद्र दिलेर और लोधी समाज के कैलाश राजपूत को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. सुरेंद्र दिलेर का परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है. उनके पिता और दादा सांसद रह चुके हैं. वहीं कैलाश राजपूत की लोधी समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है. वह पहले भाजपा में थे, बाद में बसपा में गए और फिर 2017 में भाजपा में लौट आए. इस कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि वह अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है.
