हाल ही में राजस्थान से नीट पेपर के लीक होने के बाद सरकार ने पेपर को रद्द कर दिया है. इस मामले का खुलासा जांच एंजेंसियों ने किया है. हालांकि, पेपर के लीक होने के तार केवल राजस्थान से ही नहीं बल्कि कई राज्यों से जुड़े हुए है. इसी बीच लेकिन जांच एंजेंसियों ने पेपर को सबसे पहले खरीदने वाले व्यक्ति का पता लगा लिया है. आइए जानते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम के एक डॉक्टर से दो भाई ने पेपर को खरीदा. जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने 30 लाख रुपये में NEET पेपर खरीदा था. दोनों भाईयों ने 26 और 27 अप्रैल के दिन में यह खरीदा था. पेपर खरीद के दिनेश बिवाल ने उसे अपने बेटे को दे दिया. दिनेश का बेटा सीकर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था.
धीरे-धीरे यह पेपर 29 अप्रैल के दिन कई अभिभावकों और छात्रों के पास में भेजा गया. बता दें कि दिनेश के चार बच्चों ने पिछले साल NEET का पेपर पास किया था. उन्हें पेपर के लीक होने की जानकारी पहले ही मिले चुकी थी. इसी की वजह से उन्होंने पहले ही तैयारी कर ली थी.
इसी लीक को लेकर एक नाम राकेश कुमार मंडवारिया नाम के युवक का है. दरअसल, युवक ने कई अभिभावकों और बच्चों को पैसे देकर लीक पेपर दिया था. कभी-कभी वह डिजिटल माध्यम से उसे उपलब्ध कराता था. कभी प्रिंट निकलवा कर. बता दें कि सीकर भी अब लोगों के बीच में रडार में आ चुका है. मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग लेने वाले बच्चों के बीच यह सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. इसी जांच में सामने आया हैं कि कई छात्रों और कोचिंग सेंटर ने टेलीग्राम पर ग्रुप बनाए हुए थे, जिससे प्रश्न पत्र और उसके उत्तर लोगों तक पहुंचाए गए थे.
मामले में यश नाम के एक युवक का नाम भी सामने आया है. दरअसल, हरियाणा के रहने वाले यश यादव ने छात्रों को पेपर बेचा था. हालांकि, अभी तक मुख्य स्त्रोत के बारे में पता नहीं लग पाया है. इसका खुलासा होना अभी बाकी है. अभिभावकों और छात्रों में इस मामले के बाद आक्रोश और गुस्से का माहौल है. साथ ही ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है.
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