प्रधानमंत्री की अपीलों को लेकर कई जगहों पर इसे ऑस्टेरिटी और भ्रामक कहा जा रहा था. जिसके बाद अब केंद्र सरकार ने इसको लेकर साफ कर दिया है कि अपीलों को लेकर इस शब्द का इस्तेमाल करना गलत होगा.

प्रधानमंत्री की अपील पर केंद्र सरकार की स्पष्टता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईंधन की बचत को लेकर कई अपीलें की थीं. अब पीएम मोदी की अपीलों को लेकर केंद्र सरकार ने यह साफ किया है कि उनकी तरफ से ‘ऑस्टेरिटी मेजर्स’ यानी कि किफायत बरतने का आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है. जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम मोदी की अपील को ऑस्टेरिटी कहना गलत है, क्योंकि सरकार किसी भी तरह से खर्च की कटौती और आर्थिक सख्ती को लागू नहीं कर रही है.
पीएम मोदी ने की थीं अपीलें
आपको बता दें कि कई जगहों पर पीएम मोदी की अपील को ऑस्टेरिटी मेजर्स के रूप में पेश किया था. प्रधानमंत्री मोदी ने ईंधन बचाने, जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाने और अनावश्यक विदेशी मुद्रा को कम खर्च करने की बात कही थी. सरकार का कहना है कि ऑस्टेरिटी शब्द के नकारात्मक आर्थिक मायने होते हैं और हाल की स्थिति के ऊपर यह लागू नहीं होता है.
क्या होता है ऑस्टेरिटी का मतलब?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक आमतौर पर ऑस्टेरिटी का मतलब सरकारी खर्च में कटौती, सब्सिडी कम करना, कल्याणकारी योजनाओं पर रोक और वित्तीय सख्ती से होता है, लेकिन मोदी सरकार ने न ही वेलफेयर योजनाओं या सब्सिडी में कटौती की है और न ही पूंजीगत व्यय को घटाया है. पीएम मोदी का संदेश खर्च को कम करने का नहीं बल्कि समझदारी से करने का है.
अपील को ऑस्टेरिटी कहना गलत
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनकी अपील का मकसद ईंधन की खपत को कम करना, आयातित वस्तुओं पर अनावश्यक निर्भरता को घटना और विदेशी मुद्रा पर दबाव को कम करना है. सरकार का मानना है कि ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के समझदारी से इस्तेमाल करने को आर्थिक अनुशासन से जोड़कर देखा जाना चाहिए. केंद्र सरकार ने यह साफ कर दिया है कि इस अपील को ऑस्टेरिटी कहना गलत है.
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