नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आरोपी आसाराम बापू को राजस्थान हाई कोर्ट ने राहत नहीं दी है. कोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा है. वहीं दूसरे आरोपियों को कोर्ट ने राहत दे दी है.

आसाराम की सजा बरकरार
नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम की सजा को उम्रकैद में बरकरार रखा है. आज यानी बुधवार को जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिविजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है. जिसमें आसाराम को राहत नहीं मिली है.
सरेंडर करने का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है. आपको बता दें कि फिलहाल आसाराम पैरोल पर बाहर चल रहा है, जिसको कोर्ट ने तुरंत ही सरेंडर करने के लिए भी आदेश दिया है. अंतरिम जमानत पर आसाराम बाहर है, लेकिन अब उसे तुरंत ही सरेंडर करना होगा. 2 दिनों पहले ही उसकी जमानत की छूट को 7 जुलाई तक बढ़ाया गया था.
2 आरोपियों को कोर्ट से राहत
हाई कोर्ट ने आसाराम समेत 3 आरोपियों की अपीलों पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इसमें साफ किया है कि नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा में बदलाव नहीं किया जाएगा. हालांकि इस मामले में दूसरे आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सजा से राहत मिल गई है. हाई कोर्ट ने दोनों को सजा से बरी कर दिया है. आपको बता दें कि अगस्त साल 2013 में जोधपुर में मौजूद एक आश्रम में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में आसाराम को गिरफ्तार किया गया था.
निचली अदालत ने सुनाई थी सजा
इस मामले में 25 अप्रैल साल 2018 में जोधपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. वहीं इस मामले में दूसरे आरोपी शिल्पी और शरद को 20-20 साल की सजा सुनाई गई थी. जिसके बाद सभी आरोपियों ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. जिसके बाद हाई कोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल तक डे-टू-डे सुनवाई हुई थी. जिसके बाद 20 अप्रैल को बेंच ने अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया था और उसके बाद आज फैसला सुनाया है.
यह भी पढ़ें- ‘कोई रिश्तेदार ही नहीं आया…’, गरीबी में झोपड़ी के बाहर किया पति का अंतिम संस्कार; इंसानियत हुई शर्मसार
