Rupee Fall Reasons: चीनी युआन के मुकाबले भारतीय रुपये में आई 6 से 8 फीसदी की भारी गिरावट के कारण भारत पर करीब 75,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है. इस कमजोरी से चीन से आयात होने वाले मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं, जिससे आने वाले समय में देश में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

Rupee Fall Reasons: भारत की मुद्रा रुपया इन दिनों दबाव में है. सिर्फ अमेरिकी डॉलर ही नहीं, बल्कि चीन की करेंसी युआन के मुकाबले भी रुपया कमजोर हुआ है. इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. वजह यह है कि भारत बड़ी मात्रा में चीन से सामान खरीदता है. जब रुपया कमजोर होता है, तो वही सामान खरीदने के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं. इससे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनें और कई जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्थिति आने वाले समय में महंगाई बढ़ा सकती है.
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 में 1 चीनी युआन की कीमत करीब 12.8 से 13 रुपये थी. लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 14 से 14.2 रुपये तक पहुंच गई है. यानी कुछ ही महीनों में रुपया युआन के मुकाबले 6 से 8 फीसदी तक कमजोर हो गया. इसका मतलब साफ है कि अब भारत को चीन से सामान खरीदने के लिए पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. भारत चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर उपकरण, मशीनरी और कई जरूरी सामान आयात करता है. ऐसे में रुपये की कमजोरी सीधे आयात लागत बढ़ा रही है.
भारत और चीन के व्यापार को देखें तो दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है. साल 2025 में भारत ने चीन से करीब 115 से 120 अरब डॉलर का सामान खरीदा. वहीं चीन को भारत का निर्यात सिर्फ करीब 14.5 अरब डॉलर रहा. यानी भारत ज्यादा खरीद रहा है और कम बेच रहा है. इसी को ट्रेड डेफिसिट कहा जाता है. अगर आयात लगातार बढ़ता रहा तो साल 2026 में चीन से भारत का आयात 125 से 135 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि सिर्फ रुपये की कमजोरी की वजह से भारत पर करीब 70 से 75 हजार करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
रुपये की गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. सबसे बड़ा कारण चीन से लगातार बढ़ता आयात है. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी रुपये पर दबाव डाल रही है. वेस्ट एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता की वजह से तेल महंगा हुआ है. विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लाखों करोड़ रुपये की बिकवाली की है. इससे भी रुपये पर असर पड़ा है.
रुपये को संभालने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक कई कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं. विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नए उपायों पर काम हो रहा है. स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो. सरकार ऊर्जा आयात के नए विकल्प भी तलाश रही है. इसके अलावा एनआरआई निवेश बढ़ाने और बॉन्ड बाजार को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर रुपया लगातार कमजोर होता रहा तो आने वाले दिनों में चीन से आने वाला सामान और महंगा हो सकता है.
